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सदियों से दिल के बीरान घर को सजाति आरही हूँ
क्या पता कभी तुम्हे मेरी याद आए और यहाँ रहने आजाओ
डर लगता हैं कही भूल तो नहीं गए मुझे फिर भी विश्वास हैं
खतम करने को इंतज़ार मेरी मुझे भी प्यार हैं ये कहने आजाओ......!!

सुबह से दिन ,दिन से शाम, शाम से रात आजाती हैं
कुछ टूट ती रहती हैं दिल में जैसे जान निकल कर जारही हो
कब तक घुटती रहेगी साँस सिने में बेवजह पता नहीं
ख़तम करदो ना अब इंतज़ार मेरे साथ जीने के लिए आजाओ....!!

तब से खामोश हैं होंठ मेरे जब से तेरे तराने छूट गए
उड़ गया हो कागज़ तूफान में कलम भी मेरे टूट गए
सदियों से आँसू रुकी हैं नैनो में, एक भी कतरा अभी बहा नहीं
लफ्ज़ में जान भरदो दिल के कागज़ पे प्यार भरी गजल गुनगुनाने आजाओ....!!

ना लौटने की ज़िद्द हैं अगर तुम्हारी,तुम्हारे आने की मुझे विश्वास हैं
तुम छोड़ चुके होंगे अपनों की कई दामन,पर मुझे तुम्हारी आस हैं
देखना ये हैं की किस्मे कितना असर हैं, ज़िद्द और विश्वास में
क्या पता रोते हुए नैना को फिर से रुलाने ही आजाओ....!!
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नैना...✍️✍️💕