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जब बारिश की मौसम आती हैं
जमीं पर हरी हरी नन्ही पौधे निकल आती हैं
बढ़ जाती हैं खूबसूरती फिज़ाओ की
दिल में शायरों की जाने कितनी तराने लिख जाती हैं

बहुत सुन्दर नज़ारा होता हैं सुबह के पहली किरण की 
चहरे की रंग खिलजाती हैं देख कर हरी भरी पौधो की
हल्की हल्की बहती पवनमें जब ये झूम कर लहराती हैं
दिल में शायरों की जाने कितनी अल्फाज़ लिख जाती हैं

आसमान से बरसती बादल में ये और भी सुहाना लगता हैं
बढ़ जाती हैं खूबसूरती इनकी देख कर मन बावरा होता हैं
जब गाती हैं गीत पंछिया अपनी सुरमय राग लिए
दिल में शायरों की, जाने कितनी अल्फाज़ लिख जाते हैं

इनपे ठहरे बारिश की बुँदे लगता हैं हमसे कुछ कहती हैं
दूर से देखे तो मोतियों सा चमकती, हथेली में आते पिघल जाती हैं
कभी कभी लगता हैं ये किसीके चाहत का प्रमाण देती हैं
दिल में शायरों की,जाने कितनी अल्फाज़ लिख जाते हैं

काश ये नन्हे नन्हे पौधे कभी बड़े ना होता
धरती की आँचल युही हरी भरी सुन्दर रहता 
कितना अच्छा होता जो कभी पतझड़ का मौसम ना आती
दिल में नैना के, जाने कितनी अल्फाज़ लिख जाते हैं 
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नैना...✍️💓💓