आज ही तो आया था, वो स्वर्णिम क्षण ,
पूर्ण प्रखर रश्मि से, सूर्य उगा था पन्नों में l                 

आज ही तो आया था, वो स्वर्णिम दिवस,
जब इतिहास रचा था देशभक्त के झुंडो ने l

आज ही तो आया था, वो स्वर्णिम अरुणोदय,
जो खड़ा किया था, स्वर्ण क्रान्ति की लहरों ने 

आज ही तो आया था,वो स्वर्णिम गर्व तिलक,
चुना जिसे गर्वपूर्ण, स्वभिमानियो के ललाटों ने l 

आज ही आया था क्षितिज़ में, चमका था तिरंगा,
ससम्मान गर्व से चौड़े होके, फ़हराया था आसमान में l

                   हाँ आज वही आजादी का विजय दिवस है,
स्वतंत्र घोष है,विजय तिलक है,स्वतंत्रता दिवस है ,
आजादी के विजयगान का, हाँ आज 15अगस्त हैl

शालिनी गुप्ता प्रेमकमल 
(स्वरचित)