मित्र-मित्रता दिवस विशेष काव्य
मित्र तो केवल मित्र ही होता है।
गुण उसका अपने में भर लेना।।
जीवन में सच्चा मित्र अगर हो।
सुख दुःख की बातें कर लेना।।
मित्र तो हैं सुख दुःख के साथी।
हरदम ही जो साथ निभाता है।।
बुरी राह न खुद चलते कभी हैं।
मित्र चले तो उसे भी बचाता है।।
अवगुण कोई देखा मित्र में तो।
उससे दूर रहें शिक्षा भी देता है।।
सही राह पर चलने को कहता।
दुर्गुणों को भी दूर भगा देता है।।
सच्चे मित्र ही केवल ऐसे होते।
जीवन भर ये साथ निभाता है।।
कठिन समय में साथ है रहता।
भाई जैसे ही फर्ज निभाता है।।
मित्र तो जीवन में ऐसी ख़ुश्बू।
ये चरित्र संस्कार गुण का इत्र।।
खुश किस्मत को ही मिलता।
ऐसा मित्र वही सच्चा है मित्र।।
रचयिता :
डॉ.विनय कुमार श्रीवास्तव

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