बहुत पहले की बात है
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बहुत भयानक वक़्त था,
चुनौतियों से भरे हालात थे,
वीर जवान अमर होने के लिए बेताब थे,
संदेश भिजवाया था घरों मे अपने,
ये देश गुलज़ार है जब तक आप सब का साथ है,
देश का हर वासी अपना है,
सबकी आखों में एक सपना है,
तड़प रहा हर एक परिंदा आजादी की चाहत में,
डर था आखों में,
सांसे भी चल रही थी गिनतियों मे,
विरो के प्रण निखर रहे थे,
जाने बिखर रही थी,
सब का एक ही नारा था,
रक्त का तोल था,
स्वतन्त्रता का मोल था,
घटा भी घिर चुकी थी,
गगन भी उगलता आग था,
वीर शहीद हो रहे थे,
बेडि़या खुल रही थी,
सब आजाद हो रहे थे,
और वो भयानक वक़्त भी,
धीरे धीरे ख़त्म हो हो रहा था ।।

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