रामा काकी ,को लाया गया स्टेज पर हर वर्ष की तरह ध्वजारोहण कराया गया उनके हाथों ।
जोर से वन्देमातरम के साथ कहना शुरू किया रामा काकी ने---तुम क्या समझते हो, मेरे प्यारे देश के नौनिहालों यह जो स्वतन्त्र देश मे हम तुम सांस ले रहे वो आजादी की दुल्हन सहज ही डोली चढ़कर हमारे देश आ गयी थी।
नहीं ।
आओ बताती मैं तुम्हें वो दौर जिससे आयी आजादी मेरे देश में ,---इस आजादी की दुल्हन को लाने में कितनी माँओं के लाल उनकी गोद सूनी कर गए, कितने पिताओं के सहारे छूट गए, कितनी बहनों की राखी वाली कलाई छूट गई,
कितने प्रियाओं के श्रंगार श्वेत वस्त्र में सिमट गए, कितने दुधमुंहे बच्चे पिता के स्नेह से वंचित हो गए।
कितनी युवतियों के आँखों के ख्वाब आँसूओ में सिसक गए।
कितने अनगिनत शहीद ऐसे जो इस स्वतन्त्रा की राह में हँसकर कुर्वान हो गए , जिनका नाम भी नही जानते हम सब प्यारे बच्चों उन सभी की कुर्वानी को व्यर्थ नही जाने देना, हमेशा मान रखना, देश का यह तिरंगा न झुकने देना।
जब ब हमारी भारत माँ पर दुश्मन ने बुरी नजर डाली इतिहास गवाह है चाहें वह अंग्रेजों से एक लम्बी लड़ाई हो,जिसे हमारे वीर शहीदों ने, हँसतेहँसते फाँसी के फंदे को वन्दे मातरम , कहकर चूमा , और अपने बलिदान से माँ भारती की शान बड़ाई।
चाहें बात 1999 के कारगिल के युद्ध की हो जहां सैकड़ों फुट ऊँचे पर बैठे दुश्मन को अपने फौलादी जज्बों से नाकाम कर आजाद कराया टाइगर हिल को विक्रम बत्रा के साथ मिल अनेकों वीर योद्धा ने , न अपनी उम्र की परवाह की, न माँ , पिता, न मंगेतर की ,क्योंकि सबसे आगे रखा भारत माँ के स्वाभिमान को शतशत नमन करो मेरे प्यारे बच्चों हमारे देश के उस हर एक वीर शहीद को,
जय हिंद , जय हिंद, कहकर बड़े जोश के साथ 103 साल की रामा काकी कंपकपाते हाथों से तिरँगा लहरा रहीं थी, और पलकों से बहती आँसूओं की धार से उन शहीदों की बलिदान गाथा सुना रहीं थी।
आज 103 साल की होने पर भी देश की स्वतन्त्रा का वर्णन पूरे जोश से किया, उस समय उनके रोम रोम में देशभक्ति की लहर दौड़ रही थी, क्योंकि उन्होंने देखे थे आजादी के परवानों के जोश, उस समय माना उनकी उम्र कम थी, पर दौर था आजादी की शमां हर गली मोहल्ले बड़े छोटे स्त्री पुरुष सबके मन मे जल रही थी फिर भला रामा देवी कैसे अछूती रह जाती उस देशभक्ति की लहर से, और आज उसी लहर से उन्होंने वहाँ उपस्थित सभी बच्चे बड़े , स्त्री, पुरुष को बहा दिया , ऐसा लगा मानो 1947 आँखों के सामने चलचित्र सा चल रहा और, सारा प्रांगड़ वन्दे मातरम, वीर शहीद अमर रहें के नारों से गुंजायमान हो उठा।
रामा काकी उस समय उस जिले की सबसे उम्र दराज महिला होंने के साथ देश की गुलामी का दौर अपनी आँखों से जिया तो आज सबके लिए वो बहुत सम्मानीय हैं। अक्सर 15 अगस्त, 26 जनबरी पर वो शहीदों के उस दौर को अपनी उत्साह भरी वाणी से जीवित कर देंती, आज न तो उनका स्वर काँपता , यह था उनका देश प्रेम का जज्बा जो उनकी बुलन्द आवाज के साथ आसमान में विद्वमान देवताओं को भी वीर शहीदों के स्वागतार्थ गुणगान करबा देतीं थी।
सभी एक साथ सपथ ली उस प्रांगड़ में श्रद्धासुमन अर्पित किए , फिर वन्देमातरम के साथ बच्चे पूरे जोश से देशभक्ति के कार्यक्रम प्रस्तुत कर रहे थे और रामा काकी खुश थीं अपने नन्हें देशभक्तों को देखकर , वह अपने देश सुरक्षित हाथों में महसूस कर रहीं थी।
जय हिंद💐💐🙏🙏🇮🇳🇮🇳
अन्जू दीक्षित,
बदायूँ,उत्तर प्रदेश।

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