अजीब हैरान हूं भगवान, देख के अदभुत ये नजारा,
बेजान पुतले पहनें कपडे अनमोल,ठंड से ठिठुरता गरीब बचपन बेचारा!
एयरकंडीशन मे आराम फरमाए पालतू,जेठ की धूप मे तपता मजदूर बेचारा!
छप्पन भोगो को ठुकराए वो एक लाडला मां का,सूखी रोटी को तरसता वो एक किस्मत का मारा!
मखमल के बिस्तर पर करवट बदल बिताए रात सारी,
इधर एक मजबूर पत्थरो पर सोए नींद गहरी!
भेज कर विदेश आंख के तारो को,मां-बाप वृद्धाश्रम मे भटक रहे,
एक तरफ बिन मां-बाप के बच्चे,मां की ममता को तरस रहे!
आंख अश्रु से भर गई देख, अविस्मरणीय समाज ये हमारा!
अजीब हैरान हूं भगवान,देख अदभुत ये नजारा!
श्वेता अरोडा

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