हमारे संयमित जीवन का आधार है शिक्षक,
गुरू बनकर धन्य हमारा जीवन करते हमारे संरक्षक!
गीली मिट्टी सा था शरीर हमारा,संस्कारो से अपने सर्वोत्तम सांचे मे उतारा!
मां-बाप ही है सर्वप्रथम गुरू हमारा,ग्रन्थो मे भी गुरू को भगवान से ऊपर स्वीकारा!
गुरू का अर्थ ही है जो हमे ले जाए-
तिमिर से प्रकाश की ओर
अज्ञानता से ज्ञान की ओर
बुराई से अच्छाई की ओर
कृतघ्नता से कृतज्ञता की ओर
निष्ठुरता से विनम्रता की ओर
नास्तिकता से आस्तिकता की ओर
एकाकीपन से सामाजिकता की ओर
नमन है मेरे सभी गुरूजनो को
शिक्षक दिवस की अग्रिम बधाई!
श्वेता अरोडा

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