मैं हूं नन्हा मुन्हा प्यारा प्यारा लड्डू गोपाल 
दिन भर मस्ती में खेलू कुदू करता खूब धमाल 

जब मुझको भूख लगे खाऊ माखन मिश्री,और पकवान 
कोई कहे छलिया मुझको कोई कहता बड़ा सैतान 

मैया मेरी यशोदा और बाबा नन्द का मैं लाल 
नए नए करतब  दिखाता करता जादू भी कमाल 

जन्म से ही बड़ा नटखट लीलाधर मेरा नाम
बड़े बड़े महारथी को भी धूल चटाना मेरा काम 

मामा कंस ने भेजी पूतना जो जहरीला दूध पिलाए 
उसकी क्या बिसात जो मेरे आगे टिक पाए

बकासुर , तृणासुर, वत्सासुर,अघासुर जाने कौन-कौन आया 
मैं माया का रचने वाला मेरी माया का पार ना पाया

हुई भयभीत यशोदा मैया मुख में ब्रमांड दिखाया 
 वृक्ष बने नंद कुबेर , मणि ग्रीव का उद्धार कराया 

बांसुरी की धुन पर गोपियों को खूब नचाता हूं
बाल सखा संग मिल माखन चुरा कर खाता हूं 

नाग कालिया बड़ा जहरीला फन पर नाच दिखाया 
कुपित इन्द्र ने गोकुल डुबाया उंगली  पर गोवर्धन  उठाया 

तोड़ा धनुष शिव का , कुब्जा का उद्धार किया
कंस को मार  माता - पिता को बन्धन मुक्त कराया ।।

.........@  नेहा धामा  " विजेता "
बागपत , उत्तर प्रदेश