गतांक से आगे 👇
बेबस और लाचार मृणाल अभी अपने पति की मृत्यु से उभरी भी नहीं थी कि उसे उसके परिवार और सारी दुनिया अजीब दृष्टि से देखने लगी थी । उसे घर की नौकरानी और घर का अतिरिक्त प्राणी से अधिक कुछ नहीं समझा जाने लगा था । मृणाल पर
सफेद रंग के कपड़े पहनने का दवाब भी इन दिनों पड़ने लगा था जिसे उसने अपनी बेटी के लिए सहर्ष स्वीकार कर लिया था । मृणाल घर के कामों में अपने आप को व्यस्त रखती लेकिन यहाॅं भी उसे सुनना पड़ता ... " यह मत छूना .. ऐसा नहीं करना .. सुबह - सुबह मेरे सामने नहीं आना आदि बातें उसे कही जाने लगी थी ।
जिन हालातों में मृणाल अपनी जिंदगी बिता रही थी वह अग्नि में जलकर राख होने से कम नहीं था । सरकार की तरफ से पैसे मिलते ही उसके ससुराल से उसे दूध में पड़े मक्खी की तरह निकाल कर फेंक दिया गया ।
पाॅंच महीने की नन्ही परी को लेकर वह कहाॅं जाती ?
अपने मायके वह जाना नहीं चाहती थी और ससुराल वालों ने उसे घर से और अपनी जिंदगी से भी निकाल ही दिया था । वह जाती तों कहाॅं जाती ??
मृणाल ने एक रेस्टोरेंट में बैठ कर अपने छोटे भाई को फोन किया ... आधे घंटे बाद उसका छोटा भाई अपनी बड़ी बहन के पास बैठ रोए ही जा रहा था .. वह अपनी बड़ी बहन से माफ़ी भी माॅंग रहा था कि वह चाहकर भी उसके लिए पहले भी कुछ नहीं कर पाया और अब भी कुछ नहीं कर पाएगा ।
इंसान का टूटना सामान्य हैं लेकिन हमें परिस्थितियों को समझने की जरूरत है । मुझे अब अपनी परी के लिए जीना हैं और अपनी जिंदगी में सकारात्मकता लानी हैं । मेरी जिंदगी का अब सिर्फ एक ही लक्ष्य है अपनी नन्ही परी को अपने पैरों पर खड़ी करना । मुझे सरकार की तरफ से मेरी योग्यता के आधार पर नौकरी तों मिल जाएगी लेकिन मैं यह नौकरी नही करना चाहती बल्कि मैं चाहती हूॅं कि परी अपने पिता के सपने को पूरा करते हुए सेना में अफसर बने । मैं तों दसवीं पास ही हूॅं ऐसे में मैं अफसर नहीं बन सकती ..परी को मैं पढ़ा - लिखा कर अफसर बनाना चाहती हूॅं.. मृणाल ने अपने छोटे भाई की तरफ देखते हुए कहा ।
दीदी ! मैं कुछ समझा नहीं ... सबसे पहले तों आप रहोगी कहाॅं ?? भाई ने पूछा ।
तुम मुझे सबसे पहले यहाॅं लें चल ... यह लेटर देते हुए उस सिपाही ने मुझे कहा था कि फौजी बाबू के बटालियन के कमांडिंग ऑफिसर हमारी हरसंभव मदद करेंगे ... मृणाल ने लेटर दिखाते हुए कहा ।
मैं आपके साथ चलने की कुछ तरकीब सोचता हूॅं तब तक आप कुछ खा लीजिए और वैसे भी मुझे भी तो भूख लगी है .. कहते हुए मृणाल और उसका भाई दोनों हॅंसने लगें ।
मृणाल आज छः महीने बाद खुलकर हॅंसी थी ...
दीदी ! आप एसे ही हॅंसते और खुश रहा करें .. बहुत अच्छी लगती है आप .. मृणाल के भाई ने कहा ।
फौजी बाबू भी तों मुझे हॅंसता और खुश देखना चाहते थे ... अब से मैं खुश रहुॅंगी और परी के लिए ही मेरा जीवन होगा ... मन में सोचते हुए मृणाल ने अपने आप से कहा ।
बैंक के काम से चार दिन के लिए मुझे शहर से बाहर जाना है ... आधे घंटे के अंदर ही निकलना है .. और हाॅं ! ज्यादा कुछ करने की जरूरत नहीं है . रास्ते में ही कुछ खा लूंगा .. वैसे पहुॅंचते ही होटल में तों किसी चीज की कमी नहीं होगी ... मृणाल के छोटे भाई ने घर से बाहर निकलने का बहाना बनाते हुए कहा ।
रेस्टोरेंट में एक घंटे बैठने के बाद जब मृणाल का छोटा भाई आ गया .. तीनों उस राह पर बढ़ चलें जहाॅं से मृणाल को बंद झरोखे से एक हल्की सी रोशनी दिखाई पड़ रही थी ।
परिवार ने तों उससे रिश्ता ही तोड़ लिया था लेकिन कांस्टेबल राहुल कुमार सिन्हा ने जिस कर्तव्य पथ पर चलते हुए अपनी जान दी थी और देश ने उन्हें शहीद का सम्मान दिया था वहीं आज उसकी पत्नी और बेटी के लिए उम्मीद की किरण बनकर उनका साथ देने के लिए तैयार खड़े थे ।
राहुल को अपनी मृत्यु का पूर्वाभास हो गया था इसीलिए तों उसने मरणोपरांत उसकी पत्नी और संतान को कौन - कौन सी सुविधाएं सेना की तरफ से मिलेंगी इसकी पूरी जानकारी इकट्ठी कर मृणाल को पिछली छुट्टी में ही बता दी थी .. उस समय तों मृणाल को ज्यादा कुछ तों समझ नहीं आया था लेकिन अभी अपने फौजी बाबू के कहें शब्दों का अर्थ वह आज इस मुश्किल परिस्थिति में भली-भांति जान रही थी ।
तुम्हें मेरी फिक्र इतनी थी फौजी बाबू कि सब-कुछ अपने जाने से पहले ही कर गए थे ... आज मैं सरकारी क्वार्टर में रह रही हूॅं और वह सब सुविधाएं मुझे मिल रही हैं जों एक शहीद की विधवा को मिलती हैं । हमारी परी को अफसर बनाने की बनाने की तुम्हारी चाहत मैं यहीं रहकर पूरी कर रही हूॅं ...
आज तुम्हारी नन्ही परी पाॅंच साल की हैं ... जानतें हों कक्षा पहली में आज पूरे स्कूल में अव्वल आई है तुम्हारी नन्ही परी । डी .आई. जी. सर ने खुद इसकी तारीफ की और कहा कि एक दिन यह भी अपने पिता की तरह देश का गौरव बढ़ाएगी .. एक बार पुराने अलबम में मैंने तुम्हारे बचपन की तस्वीरें देखी थी .. नन्ही परी ने तुम्हारी ही छवि पाई है .. बिल्कुल तुम्हारी तरह दिखती है .. वही हॅंसी ... वही मस्ताना अंदाज ... और वही मेरी ऑंखों में दर्द नहीं देख पाने की आदत ... पाॅंच साल की हैं लेकिन उसकी बातें पचपन साल की दादी - अम्मा से कम बिल्कुल भी नहीं है .. राहुल की फोटो को अपने सीने से लगाए मृणाल ने अपने फौजी बाबू से कहा ।
साल - दर - साल नन्ही परी बड़ी हों रही थी और अपने पिता के सपने के करीब भी ।
परी ने आर्मी में ऑफिसर बनने के लिए यू पी एस सी ( UPSC ) के एन डी ए ( NDA) की परीक्षा पास कर ली थी तभी उसने सेना के ही जे.सी.ओ ( जूनियर कमीशन्ड ऑफिसर्स ) की भर्ती के बारे में सुना । इसमें भर्ती किए जाने वाले ज्यादातर अधिकारी सेना में साइबर वॉरियर के तौर पर काम करते हैं और आतंकवाद के खिलाफ लड़ने में अपनी अहम भूमिका निभाते हैं .. चूॅंकि परी के पिता भी आतंकवादियों की ही गोली का शिकार हुए थे ... ऐसे में आतंकवादियों के खिलाफ लड़ने वाली रैंक में सफलता पाना अब परी का लक्ष्य बन गया था हालांकि मृणाल ने जब यह सुना तो अपने पति की तरह अपने बेटी को भी खोने के भय से इसका विरोध किया लेकिन अपने पिता के ही नक्शे-कदम पर चलने वाली अपनी बेटी के सामने वह ऐसे हार गई जैसे कभी अपने फौजी बाबू के सामने हारी थी ।
परी अब जे सी ओ की अधिकारी बन चुकी थी और जे सी ओ बनने वाले अन्य अधिकारियों के साथ ऑफिसर ट्रेनिंग एकेडमी में ट्रेनिंग कर रही है । नौ महीने की मिलिट्री ट्रेनिंग के बाद परी को छ: महीने की जॉब ट्रेनिंग दी गई और आज उसकी पहली पोस्टिंग अपने पिता के शहर में ही हुई है ।
प्रियांशी मृणाल राहुल कुमार सिन्हा रिपोर्टिंग सर ...
कहते हुए परी ने अपने पिता की तस्वीर को सैल्यूट किया । मृणाल के दिल में भावनाओं का वेग ऐसा उठा जिससे उसकी ऑंखो में ऑंसूओं की नदियां ही बहने लगी ।
नहीं माॅं ! आज भी आप रो नहीं सकती ... आपने ही तो कहा था पापा आपकी ऑंखो में ऑंसू नही देखना चाहते थें ... वैसे मैं भी कभी आपकी ऑंखो में ऑंसू नही देखना चाहती .. पापा से जैसे आपने वादा किया था और उस वादों को निभाने के लिए आपने ना तों कभी परिवार की ही परवाह की और ना ही किसी समाज की । पापा की तरह ही मुझे भी आपसे वही वादा चाहिए ... कहते हुए परी मृणाल के गले लग गई ।
मृणाल ने भी परी के घूरकर देखने के बाद मौन स्वीकृति दे दी और अपनी ऑंखों से ऑंसूओं को गिरने से पहले ही समेट लिया ।
वर्षों बाद अपने शहर में घुसते ही मृणाल अपने अतीत में चली गई ... उस शहर में गुजरी हर एक रात और दिन उसके स्मृति पटल पर उभरने लगे ।
माॅं ! कैंप आ गया ... देखिए कितना सुंदर है ना ??
परी की आवाज सुनकर मृणाल अतीत के गलियारों से निकल कर वर्तमान की धरातल पर आ गई ।
कैंप और परी को मिला क्वार्टर वाकई बहुत अच्छा था ... सारी सुख-सुविधाएं से भरा क्वार्टर ... दो - तीन सेवादार ... एक बाहर बगीचे और आस-पास की सफ़ाई कर रहा ... दूसरा सामानों को सही स्थान पर रख रहा .. तों तीसरा किचन में खाना पका रहा ...
तुरंत ही परी और मृणाल के लिए चाय के साथ पानी और कुकीज़ भी आ गई ।
बेटा ! यह तुम किचन में क्या कर रहे हो ?? .. बाहर जाओ .. कहती हुई मृणाल ने खाना बना रहें लड़कों से कहा ।
माॅंजी ! आप बाहर जाकर बैठिए और मुझे अपना काम करने दीजिए ।
मृणाल कुछ बोलने ही वाली थी कि फोन पर बात कर रही परी उसके पास आ गई और अपनी माॅं को कंधे से पकड़ कर सोफे पर बिठा दिया ।
माॅं ! आप निश्चिंत होकर बैठिए और सबको अपना काम करनें दीजिए ... अब आपको कुछ नहीं करना है बल्कि सिर्फ और सिर्फ खुश रहना हैं और आराम करना हैं ... आज से मृणाल - एक संघर्ष कथा समाप्त ... मुस्कुरा कर परी ने कहा ।
तुमने वह डायरी कब पढ़ी ?? मृणाल ने आश्चर्य से परी की तरफ देखते हुए पूछा ।
आप मुझे कुछ नहीं बताएंगी तों मुझे पता नहीं चलेगा .. मैंने मामा जी से भी पूछा था .. उन्होंने भी मुझे नहीं बताया .. सिर्फ इतना कहा कि तेरी माॅं बचपन से ही अपने मन की बात डायरी में लिखती हैं .. मुझे पता चल चुका था कि अब मुझे किसी से भी कुछ पूछने की जरूरत नहीं .. मेरे सभी सवालों का कोई जवाब दें सकता है तों वह है सिर्फ " आपकी डायरी " । ... मृणाल अपनी नन्ही परी जों अब एक अफसर बन चुकी थी के सिर पर स्नेह से हाथ फेरने लगी ।
कुछ हफ्तों बाद 👇
माॅं ! यह देखो अखबार में राहुल की बेटी का इंटरव्यू छपा है .... उसकी तस्वीर भी छपी है ... अखबार को राहुल की माॅं की तरफ बढ़ाते हुए राहुल के बड़े भाई ने कहा । राहुल की माॅं ने अपना चश्मा ठीक किया और अखबार में छपी परी की तस्वीर को ध्यान से देखने लगी ।
दिख रही है ना एकदम राहुल की परछाई ... राहुल भी तों वर्दी पहन कर ऐसे ही खुबसूरत दिखता था ... आज आखिर मृणाल ने अपनी बेटी को अकेले ही पाल - पोस कर सेना में अधिकारी बना ही दिया ..
राहुल के बड़े भाई ने कहा ।
मैम ! आपसे मिलने कोई आएं है .. अपने असिस्टेंट की आवाज सुनकर परी ने फाइल से अपनी नजर हटाकर असिस्टेंट को देखा और उन्हें अंदर भेजने का इशारा करतें हुए पुनः अपनी नजरें फाइल पर गडा़ दी ।
दरवाजा खुलते ही सामने एक बुजुर्ग महिला और साथ में अधेड़ उम्र के आदमी को देखकर परी अपनी कुर्सी से उठ खड़ी हुई । असिस्टेंट को पानी लाने के बहाने बाहर भेजकर परी ने उन दोनों को शालीनतापूर्वक कुर्सी पर बिठाया और खुद भी जाकर अपनी कुर्सी पर बैठ गई ।
बेटा ! हम तुमसे मिलना चाहते थे .. बड़ी मुश्किल से तुम तक पहुॅंचे है .. अधेड़ उम्र के आदमी ने कहा ।
आपलोग ! मुझसे क्यों मिलना चाहते थे ?? क्या बात है ?? खुल कर कहिए .. परी ने कहा ।
बेटा ! शायद तुमने हमें पहचाना नहीं .. पहचानोगी भी कैसे ?? हम आज से पहले मिले भी तो नहीं थे ।
यह तुम्हारी दादी है और मैं तुम्हारा चाचा .. हम तुमसे और मृणाल से मिलने आएं हैं ... बुजुर्ग महिला की तरफ इशारा करते हुए अधेड़ उम्र के आदमी ने कहा ।
असिस्टेंट पानी रखकर परी के कहने पर बाहर चला गया ।
परी ने पानी की तरफ इशारा करते हुए कहा - " आपलोग बड़ी देर से और बड़ी दूर से मेरे पास आएं हैं पहले पानी पीजिए बातें बाद में करतें हैं ।
दोनों ने पानी पी लिया और परी की तरफ देखते लगें ।
मेरा इंटरव्यू देखकर आप लोग यहाॅं आएं हैं ? परी ने कहा ।
हाॅं ! इंटरव्यू पढ़ कर ही तों मुझे पता चला कि मेरी पोती और मेरे राहुल की बेटी आज इतनी बड़ी अफसर बन गई है तों हम मिलने आ गए .. बुजुर्ग महिला जों परी की दादी थी ने कहा ।
आज ही आपको मेरी याद आई .. जिस दिन आपकी पोती को आपकी जरूरत थी आपने हमसे मुॅंह मोड़ लिया था यह कहकर कि मैं एक लड़की हूॅं । मेरी माॅं को आपने बहुत कुछ कहा और उन्होंने मेरे कारण वह सुना और सहा भी .. परी ने कहना शुरू किया ।
ऐसी बात नहीं है ... तुम्हारी माॅं ने तुमसे गलत कहा होगा ... परी की दादी ने समझाना चाहा ।
मेरी माॅं ने मुझे कुछ नहीं कहा है .. मैं तों यह सब जानती तक नहीं अगर मैंने उनकी डायरी ना पढ़ी होती ... परी ने गुस्से में कहा ।
बेटा ! हमें एक बार मृणाल से मिलना है .. इस बार परी के चाचा ने कहा ।
आप लोगों से विनती है .. जैसे आज से पहले हम आपकी जिंदगी में कोई मायने नहीं रखतें थे वैसे ही आज के बाद भी आपलोग यही समझना कि हमलोग आपके लिए मर चुके हैं .. मैं नहीं चाहती कि जिस संघर्ष के साथ आज तक मेरी माॅं रही वही आगे भी उनके साथ होता रहें .. कल को आप लोग और यह समाज मेरी माॅं को खुश देखकर यह भी कह सकता हैं कि एक विधवा इतनी खुश क्यों हैं ? इसके पीछे भी जरूर कोई बात हैं ... वादा निभाने के लिए मेरी माॅं ने अपने ऑंसूओं को सूखा लिया था और उस समय भी आप लोग और यह समाज उस पर लांछन लगाने में पीछे नहीं रहा ... एसे लोगो से मैं अपनी माॅं को आज के बाद मिलने तक नहीं देना चाहती ... आप दोनों मेरे श्रेष्ठ है .. मेरी माॅं द्वारा दिए संस्कार मुझमें अभी भी हैं .. ऐसा ना हों कि गुस्से में मैं अपने संस्कारों को भूल जाऊं और आप दोनों से वह सब कुछ कह दूं जों आपके लिए छोटों से सुनना असहनीय हो ... इससे बेहतर हैं आप लोग यहाॅं से चलें जाएं और हमें हमारे हाल पर छोड़ दें ... कहते हुए परी ने अपने केबिन का दरवाजा खोल दिया और उन दोनों को बाहर जाने का इशारा करने लगी ।
अपनी दादी और चाचा के बाहर जाते ही परी अपनी कुर्सी पर सिर टिका कर बैठ गई ।
नहीं माॅं ! मैंने जों भी आज इनके साथ किया इससे ज्यादा वह डिजर्व करते हैं ... अगर यें दोनों आप तक पहुॅंच जातें तों इनकी बातें सुन आप इन्हें माफ़ कर देती लेकिन मैं इनको कभी भी माफ़ नहीं कर सकती .. इन्होंने मुझे लड़की समझ अपने घर से निकाला था और आप पर इतने लांछन लगाए ..
अब आप उनकेे बेटे की विधवा नहीं बल्कि लेफ्टिनेंट प्रियांशी मृणाल राहुल सिन्हा की माॅं हैं .. अब आपकी जिंदगी में कोई भी संघर्ष नहीं ... कोई कष्ट नहीं .. सिर्फ और सिर्फ खुशियां ही होंगी .. कहते हुए परी ने अपनी ऑंखें बंद ही की थी कि उसके असिस्टेंट ने बताया कि टू आई सी ( सेकेंड इन कमांड ) सर ने आतंकी हमले की रूपरेखा तैयार करने के संबंध में आपको मीटिंग में बुलाया है ।
राहुल और मृणाल की परी अपने पिता की तरह ही पारिवारिक कर्तव्यों का निर्वहन कर देश के प्रति अपने कर्तव्यों का निर्वहन एक नए हौसलें के साथ करने के लिए निकल पड़ती है ।
समाप्त
धन्यवाद 🙏🏻🙏🏻
" गुॅंजन कमल " 💓💞💗

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