ये झुठा प्यार, ये वादे ।
ये  तकरार रहने दो।
युही खुश हु मुझे तुम मेरे ।
इस हाल रहने दो ।

दिया है जख्म जो तुम ने ।
कभी भुला ना पाऊँगी। 
दर्द मंजुर है मुझ को ।
ये झुठा प्यार जाने  दो ।

तुम क्यु कहते हो ये मुझ से।
के तुम बिन जी नही सकता ।
अकेली छोड़ दो मुझ को ।
के ये एहसान रहने दो ।

बेवफा बोल कर मुझ को ।
तुम क्यु मुझ को बुलाते हो ।
अकेली छोड़ दो मुझ को ।
के ये इल्जाम रहने दो ।

मतलबी लोग है सारे ।
साथ कोई नही देता ।
मुझे तुम छोड़ दो तन्हा। 
मुझे गुमनाम रहने दो ।

लगाऐ है गुना मुझ पर ।
के मै वफा नही करती ।
मुझे तुम छोड़ दो तन्हा। 
के ये इल्जाम रहने दो ।
रितु शर्मा