सूखा सा था मन उपवन
देखो अब गुलजार हुआ
हाँ मुझको भी प्यार हुआ......।
सफेद सा लिबास था,
मन रहता उदास था
रंग ना राग था
तितली सा अब मन हुआ
हाँ मुझको भी प्यार हुआ......।
मन को कैसे समझाऊँ,
रंग कैसे मैं भरूँ
रीत जो बनाई है
कैसे उसे तोड़ दूँ
ये मुझे क्या हुआ
क्यों मुझे प्यार हुआ.......।
प्रेम जिसका आधा है,
एक राधा है एक मीरा है
प्रेम की परिभाषा है
आधा हो के पूरा है
मन मेरा समझ गया
राधा सा प्यार हुआ
हाँ मुझे प्यार हुआ ..….....।
ऋचा कर्ण✍✍😊🙏

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