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जिंदगी को बहुत करीब से देखा है
हमने किसी को हंसते हुए देखा है
तो किसी को रोते हुए देखा है हमने
कैसे बयां करुं अपने कांपते हुए
लफ्जों को लोगों के बिलखते चेहरे
को सिसकते हुए नयनों को
कहीं जलती हुई लाशें
कहीं तैरती हुई लाशें
कहीं समुह में भुमिगत
होती हुई लाशें देखा है हमने
जिंदगी को बहुत करीब
से देखा है हमने
खुदा न करे फिर कभी
ऐसा पल आए
मुश्कुराता चेहरा फिर
गमगीन हो जाए
अपनों से अपना छुट जाए
बेबसी ऐसी अपने चहेतों को
अपने से दुर करते देखा है तो
कभी आक्सीजन की
आभाव में तड़प-तड़पकर
कर मरते देखा है हमने
जिंदगी को बहुत करीब
से देखा है हमने
ये क्या हो गया रब्बा जो
कभी किसी की किलकारियों से
सारी फिज़ा महक जाती
थी आज उसीं घरों से
मातम की आवाज आती है
दिल को दहलाती है
ये क्या देखा है हमने
जिंदगी को बहुत करीब
से देखा है हमने
ये कैसी वबा आई है
हवा में ज़हर लाई है
इससे बचना है तो
सावधानी बरतना है
लोगों को जागरूक करना है
भारत को बचाना है
( स्वरचित ✍️)
अफ्फान हाजिपुरी
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