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भाई-बहनों के पवित्र प्यार स्नेह का ये बंधन है,
कच्चे धागे का पर्व पक्के डोर का रक्षाबंधन है।
बहने भाइयों के हाथों में बाँधेंगीं स्नेह का धागा,
आदर प्रेम आशीष भरा यह रक्षासूत्र का धागा।
रक्षाबंधन मामूली धागे का कोई नहीं है त्यौहार,
इसके हर धागे में रचाबसा भाई-बहन का प्यार।
ये त्यौहार संकल्प दिलाता है बहनों की हो रक्षा,
बहनें राखी बांध भाइयों से पायें उपहार सुरक्षा।
बहनें भी आशीष हैं देती ये भाई सुखी रहे हमेशा,
चाहे अमीर हो या गरीब हो कोई भी करता पेशा।
बेटियों के प्रति समाज से रूढ़िवादी सोच दूर करें,
भार नहीं ये हैं कोई शिक्षा संस्कार दे इन्हें पूर करें।
यदि किसी घर में नहीं है ये प्यारी अनमोल बेटियाँ,
भाई कैसे बँधा सकेगा निज हाथ कभी ये राखियाँ
जब तक गर्ल चाइल्ड यारों मन से नहीं बचाओ गे,
रक्षाबंधन पर्व पे दूजे घर जाके राखी बंधवाओ गे।
अबकी रक्षा बंधन पर यह भी तो एक संकल्प करें,
प्रभु के महावरदान बेटियों का सुरक्षा संकल्प करें।
हँसीख़ुशी फिर हर आंगन मेंहो रक्षा बंधन त्यौहार,
जहाँ बेटियाँ ब्याही जातीं उनके भी महके घरद्वार।
रचयिता :
डॉ.विनय कुमार श्रीवास्तव

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