पिछले भाग में आपने पढ़ा कि साँची और मोहित एक-दूसरे से टकरा जाते हैं और दोनों का आमना-सामना होता है,अब आगे-

मोहित उससे पूछ रहा था और वो उसी में ही खोई हुई थी!तभी वहाँ दौड़कर परवीन आती है और साँची को हिलाती है और कहती है जवाब क्यों नही देती साँची?

अब साँची भी होश में आ जाती है और बताती है जी हम यहाँ कोई घूमने नही आए हैं,आप सभी को आपकी पसन्द का भोजन मिल सके इसीलिए आए हैं!

क्या मतलब,क्या कहना चाहती हो तुम?मोहित साँची से पूछता है!

आप हमें जो बिना किसी वजह के डाँटते हैं ना,वो बहुत गलत बात है!जिस कैंटीन में आप सभी फौजियों का खाना बनता है वो मेरे पापा की ही है और मैं उनकी मदद करवाने के लिए ही आती हूँ यहाँ!

इससे पहले के मोहित कुछ बोलता परवीन बोलती है सर् जी,ये जो आपने अभी-२ इतना स्वादिष्ट भोजन खाया है ना वो हमारी साँची ने ही बनाया है!

अब मोहित को भी अपने बोले हुए शब्दों का पछतावा होता है और वो कहता है मुझे माफ़ कीजियेगा साँची जी!

साँची अब कहती है कोई बात नही सर् हमने भी तो कल आपको नही पहचाना था,ये कहकर वो वहाँ से जैसे ही जाने लगती है कि तभी मोहित उसे आवाज देता है सुनिये!


साँची तो पहले ही कुछ देर ओर मोहित से बातें करना चाहती थी,वो मोहित की आवाज सुनते ही मुड़कर देखती है   और पूछती है जी कहिये!

आपने खाना बहुत स्वाद बनाया था,मुझे सच मे माँ की याद आ गई!मोहित उसे कहता है तो वो भी उसे धन्यवाद करती है!

अब जैसे ही वो फिर से जाने लगती है तो मोहित उसे फिर से आवाज देता है और कहता है क्या आप मेरे लिए एक चीज बना सकती हैं?

जी कौनसी?साँची मोहित से पूछती है!

क्या आपको राजस्थानी खाना आता है?मोहित उससे पूछता है!

साँची उसे कहती है नही आता तो नही दूसरा यहाँ का मेन्यू भी अलग है,वैसे आपको क्या खाना था?

जी मेरा दाल बाटी खाने का बहुत मन था,लेकिन कोई बात नही आप रहने दीजिए!मोहित ये कहकर वहाँ से चला जाता  है!

साँची का भी मन उदास हो जाता है ये सोचकर कि आज पहली बार उसे कोई अच्छा लगा लेकिन वो उसे उसकी पसन्द का कुछ खिला भी नही सकती!ये सोचते हुए वो अपने घर आ जाती है और मोहित भी अब अपनी ड्यूटी में व्यस्त हो जाता है!आज ही खबर मिली है कि आतंकवादी हमला करने वाले हैं इसीलिए सुरक्षा बढ़ा दी गई है और सभी फौजियों को सख्त हिदायत दी गई है हद से ज्यादा चौकसी की!इस तरह से एक हफ्ता बीत गया है और एक दिन अचानक परवीन दोपहर के समय मोहित के पास आती है और कहती है सर् आज आप खाना ना खाएँ!

मोहित हैरान होकर पूछता है क्यों मैं खाना क्यों नही खा सकता परवीन?

अब परवीन कहती हैं आपको साँची ने अभी,इसी वक्त बुलाया है,वो किसी परेशानी में है!आप मेरे साथ चलिए!

मोहित भी साँची का नाम सुनकर तड़प जाता है क्योंकि कई दिनों से सरहद की रक्षा करते-२ उसे ये भी ख्याल नही रहा कि साँची उसके इर्द-गिर्द ही रहती है,वो उसके करीब होते हुए भी उसे देख नही पाया था!लेकिन आज साँची का सुनकर वो तड़प गया और खुद ही उसके कदम उससे मिलने चल दिये!

परवीन उसे अपने साथ एक बहुत खूबसूरत जगह पर ले जाती है,जहाँ एक बड़े से पत्थर पर साँची बैठी है और साथ मे पानी बह रहा है!वहाँ दूर-२ तक कोई भी नही है सिवाय साँची के!परवीन उसे वहाँ छोड़कर चली जाती है और वो दौड़कर साँची के पास जाकर पूछता है क्या हुआ साँची,क्यों परेशान हो?

साँची उसे देखकर मुस्कुराने लगती है और कहती है अब परेशानी दूर हो जाएगी!

क्या मतलब क्या कहना चाहती हो तुम?मोहित हैरान होकर पूछता है!

तभी साँची उसके सामने खाने का डिब्बा खोल देती है जिसमे वो दाल-बाटी बनाकर लाई है!अब साँची मोहित को कहती है इसे बना नही पा रही थी इसीलिए बहुत परेशान थी मैं,लेकिन कई दिनों के अभ्यास के बाद आज बना पाई हूँ इसीलिए परेशान थी!आप खाकर बताएं कैसी बनी है?

मोहित की आँखों मे खुशी के आँसू बहने लगते हैं और वो जैसे ही एक निवाला बाटी का तोड़कर दाल के साथ खाता है तो हद से ज्यादा खुश हो जाता है और साँची को गले लगाकर कहता है साँची तुमने आज मुझे मेरी माँ की याद दिला दी सचमे!

साँची कुछ नही कहती और अगला निवाला अपने हाथ से तोड़कर उसे खिलाती है!अब मोहित भी सारी दाल बाटी खा लेता है और साँची से कहता है एक बात पूछ सकता हूँ तुमसे?

साँची कहती है जी पूछिये!

क्या मैं जान सकता हूँ कि तुमने ये कैसे सीखी?मोहित पूछता है!

जी आजकल इंटरनेट का जमाना है ,वहाँ से आप कुछ भी सीख सकते हैं!साँची उसे जवाब देती है!

अब मोहित उसे कहता है मेरे लिए इतना सब क्यों किया तुमने साँची?

साँची उसके करीब आकर कहती है अपने दिल से पूछ लीजिएगा,जवाब मिल जाएगा जरूर!

मोहित अब उसका हाथ पकड़ कर कहता है मेरे दिल से तो एक ही जवाब आ रहा है कि आपको हम से प्यार हो गया है!मोहित के द्वारा बोले गए इन शरारत भरे शब्दों से शर्माकर ज्यों ही साँची उठकर जाने लगती है कि तभी मोहित उसका हाथ पकड़ कर रोक लेता है और कहता है साँची इस शर्म को बीच मे मत लाओ,एक फौजी हूँ कल ना रहा तो दिल की बात दिल में ही रह जाएगी तुम्हारे!

साँची अब उसके मूहँ पर हाथ रखकर कहती है,नही ऐसा मत कहिये!आपको मेरा प्यार मौत के मूहँ से भी खींचकर ले आएगा एक दिन!इतनी शिद्द्त से चाहती हूँ आपको,ये कहकर वो मोहित के गले लग जाती है और मोहित भी उसके आगोश में खो सा जाता है कि तभी कुछ देर बाद मोहित के फोन की घँटी बजती है,जिसे सुनकर वो साँची से अलग होकर एक दम से खड़ा हो जाता है और कहता है साँची मुझे जाना होगा!

लेकिन कहाँ?साँची मोहित से पूछती है!

अपना फर्ज निभाने साँची,अभी-२ खबर मिली है कि यहीं पास में ही बन्द पड़ी हुई एक पुरानी फैक्ट्री में आतंकवादी छुपे हुए हैं,इसीलिए अभी जाना है!अगर वापिस आया तो सारी जिंदगी तुम्हारे हाथ की दाल-बाटी खाना चाहता हूँ मैं,बोलो खिलाओगी?


हाँ मोहित,साँची तुम्हारा इन्तेजार करेगी!

और अगर मैं ना आया वापिस तो?मोहित साँची से पूछता है!


तुम आओगे मोहित ,जरूर आओगे!मेरा प्यार तुम्हे वापिस लाएगा देखना!ये कहकर दोनों गले लगते हैं और मोहित तभी वहाँ से चला जाता है!

अगला भाग-कल

ॐ नमःशिवाय
🙏🙏🙏🙏🙏