ज्ञान का प्रकाश तू दिखाता चला गया
कच्चे मिट्टी के घड़े को ‌ज्ञान  के
भंडारे में ढालता चला गया
मंजिल दिखाता चला गया
राह तू दिखाते चला गया
मंजिलों के सफर में मार्गदर्शन
कराता चला गया.......
रास्ते कठिन थे ज्ञान का प्रकाश
फैलाता चला गया...
जिन मंजिलों का रास्ता पता नहीं था
मार्गदर्शन कराता  चला गया
तेरे मार्गदर्शन से गुरु कुछ भी असंभव नहीं.................
छात्रों के जीवन में ज्ञान की ज्योति फैलाता चला गया
उस गुरु के चरणों में शीश हम निभाते है पहले पाठशाला के बाद तेरा स्थान है गुरु उस गुरु के चरणों में अपना सिर झुकाते हैं..........
महाभारत में अर्जुन जीत पाते नहीं
गुरु के ज्ञान के बिना अधूरा है
द्रोणाचार्य और कृष्ण के बिना
अर्जुन इस मुकाम तक आते नहीं
उस  गुरु को सत सत नमन
उसे गुरु की महिमा का कितना बखान करु उस गुरु को शत-शत नमन

सपना कुमारी जहानाबाद बिहार