अपनों के दिए दर्द को कैसे बताऊं
तुम तोअपने हो दर्द दो या दो खुशी
मुझे क्या चाहिए मैं कैसे समझाऊं
तरस आता हो मेरे हालात पर अगर
तो मैं दिल की धड़कनों को मनाऊं
हो अगर निर्मम हृदय के दास तुम
तो तुम्हारी यादों को अब भूल जाऊं
मैं तेरे जीवन का हिस्सा हूं ?"प्रिया"
अब मैं तुझपे कैसे यकीन कर पाऊं
(विषयवस्तु पर आधारित काल्पनिक रचना)
संगीता शर्मा" प्रिया"

0 टिप्पणियाँ