प्रीत के धागे हैं अनमोल,
प्रीत बिसरत नैंयां, 
प्रीत बिसरत नैंयां मौरी गुंइयाँ,

प्रीत के धागे हैं अनमोल,
मात पिता का रिश्ता,
जन्म जन्म का नाता,
प्रीत बिसरत नैंयां मौरी गुंइयाँ,

प्रीत के धागे हैं अनमोल,
भाई बहिन का रिश्ता तो,
कच्चे धागों से बंधा,
प्रीत बिसरत नैंयां मौरी गुंइयाँ,

प्रीत के धागे हैं अनमोल,
रक्षाबंधन का त्यौहार,
बहिन के लिए सौगात, 
प्रीत बिसरत नैंयां मौरी गुंइयाँ,

प्रीत के धागे हैं अनमोल,
राखी से सजे भाई की कलाई,
देता आशीष बहिन को, 
प्रीत बिसरत नैंयां मौरी गुंइयाँ,

प्रीत के धागे हैं अनमोल,
बेटी जब होती पराई,
पति से नाता अटूट, 
प्रीत बिसरत नैंयां मौरी गुंइयाँ,

प्रीत के धागे हैं अनमोल,
प्रीत बिसरत नैंयां,
प्रीत बिसरत नैंयां...।

    काव्य रचना-रजनी कटारे
         जबलपुर ( म.प्र.)