रविश - आपके लिए ये लेने गया था । आपको पसंद हैं ना ! स्वाति रविश को   आश्चर्य से देखने लगती है । 
स्वाति - आपको कैसे पता की मुझे करेले की सब्जी और मीठा अचार पसंद है और आपको ये सब मिले कहां ! रविश - पता कर लिया और रही बात इनकी तो यह सब घर में बनी हुई है । (रविश धीरे से ) हमारे घर में किसी को भी करेला पसंद नहीं है , वो तो बड़े पापा शुगर के मरीज हैं । इसलिए हफ़्ते में एक , दो बार करेले की सब्जी बनती है । स्वाति - और मीठे अचार ?  " वो मुझे भी बहुत पसंद हैं " मां मेरे लिए अलग से मीठे अचार बनाती है " रविश ने मुस्कुराते हुए कहा ।  रानी , रविश को खाना परोसते देखकर उसे छेड़ती है 
 - क्या बात है भैया , आज तो बड़ा आप खाना परोस रहे हो ! आज से तो हमें कभी हमें नहीं परोसा ....देख लो मम्मी आपका बेटा बिगड़ गया । ये कह कर रानी वहां से भाग जाती है । 
रविश - रूक रानी की बच्ची अभी बताता हूं तुझे । रविश , रानी को पकड़ लेता है और उसके कान खिंचते हुए - बोल क्या बोल रही थी अभी ! 
रानी झूठा गुस्सा दिखाते हुए - कुछ नहीं भाई , माफ़ कर दो प्लीज़ , आगे से ऐसा मजाक कभी नहीं करूंगी । प्लीज़ भाई मेरे कान दुःख रहे हैं । रविश - ये हुई ना बात ! 
रविश , रानी को छोड़ देता है , रानी जल्दी से भाग कर अपने रुम की तरफ जाते हुए रूक जाती है और शोले फिल्म की नकल करते हुए रविश से कहती हैं । 
रानी - भईया .... अपने किए कि सजा आपको जरूर मिलेगी , बरोबर मिलेगी । 
रविश के आंख दिखाते ही रानी अपने रुम में तुरंत घुस जाती है । सभी घर वाले दोनों की नोंक - झोंक देखकर हंसते हैं । सौरभ हंसते हुए रविश को देखकर कहता है । " अब तो तुम गये काम से  , रविश ये तुम्हें नहीं छोड़ेगी । रविश कुछ नहीं कहता सिर्फ मुस्कुरा कर रह जाता है । खाने पीने का कार्यक्रम निबटने के बाद सभी शाम के रिसेप्शन की तैयारी में जुट जाते हैं 
क्रमशः 
रचनाकार 
श्वेता सोनी