आ गई बरसात,
लेकर खुशियों की सौगात।
काले काले बदरा,
उमड़ घुमड़ आए।।
रिमझिम में भीगे,
सब मिल साथ।
पड़ गए झूले ,
गावे कजरी नाचे,
हिल मिल सब साथ।।
धरती ने ओढ़ी धानी चुनर,
मेहंदी से रच गए गोरे गोरे हाथ।
फहर फहर फहराए तिरंगा,
लहर लहर लहराए गंगा,
हर हर भोले कावड़िया साथ।।
मातृभूमि के सभी सिपाही,
मां भारती का करते बंदन,
रहता मां का आशीष साथ।
खुशियां हो जाए सब की दूनी,
आशा विनती करें भोलेनाथ से,
सबकी झोली भर दो आज।।
स्वरचित मौलिक अप्रकाशित सर्वाधिकार युक्त डॉ आशा श्रीवास्तव जबलपुर

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