रचना - स्वाति मन ही मन - रविश आप जितना मेरा और शिवांश का ख्याल रख रहे हैं । उसका एक प्रतिशत भी मैं आपकी जीवन साथी होने का फर्ज नहीं निभा रही हूं । मुझे इस रिश्ते को दिल से माना के लिए कुछ वक्त चाहिए । रवीश , स्वाति को सोचते हुए देखकर उसके सामने चुटकी बजाकर उसे ख्यालों से बाहर लाता है ।
रविश - कहां खो गई आप , आप कपड़े बदल लीजिए । तब तक मैं शिवू को मां के पास से लेकर आता हूं ।
स्वाति थोड़ा परेशान होते हुए - अगर मां नाराज हो गई तो !
रविश मुस्कुराते हुए - स्वाति वो एक मां हैं और सभी मांओं की तरह अपने बच्चे का अच्छा ही सोचती हैं । खुशी चाहती है । मेरी मां भी वैसे ही है । तुम फ़िक्र मत करो अगर मैं नाराज हुई तो मैं उन्हें मना लूंगा । तुम परेशान मत हो । अब आप जाइये और कपड़े बदल कर आइये । मैं थोड़ी देर में आता हूं । ये कहकर रविश अपनी मां के कमरे की तरफ जाते है । रविश , सरला जी के कमरें में जाकर ...
रविश - मां आप अभी तक सोई नहीं ।
सरला जी - रविश आओ बेटा । रविश सरला जी के पास बैठ जाते हैं ।
पता है बेटा इंसान को दो सुरतों में नींद नहीं आती । पहला तब , जब वो बहुत दुखी हो और दूसरा तब जब बहुत खुश हो । मैं आज बहुत खुश हूं , कि तुम अपने अतीत को भूल कर आगे बढ़ गये । साक्षी ने जो तुम्हारे साथ किया । तुम सब कुछ भूल कर आगे बढ़ गये । " मां मैं न नहीं चाहता कि इस घर में अब साक्षी के बारे में कोई बात हो । मैं उसे भूल चुका हूं और मैं नहीं चाहता कि स्वाति को साक्षी के बारे में कुछ भी पता चले । " रविश , सरला जी की बात बीच में काटते हुए धीरे से कहते है । रविश थोड़ा झिझकते हुए - मां ....वो शिवांश को अपने साथ लेने आया हूं । अभी वो छोटा है और आज तक स्वाति के बगैर सोया नहीं है । अगर रात में उसकी नींद खुल गई तो आपको परेशान करेगा । इसलिए मैं ... बोलते - बोलते चुप हो गये रविश । सरला जी - रविश ...आज की रात तुम्हारे और स्वाति के लिए खास है बेटा तुम दोनों एक-दूसरे को समझो एक दूसरे को समझो । अपनी नई जिंदगी की शुरुआत करो । इसलिए मैं शिवांश को अपने पास ले आई । रविश प्यार से अपनी मां को समझाते हुए - मां मैं चाहता हूं कि स्वाति मुझे दिल से अपनाये । मैं उसकी आंखों में अपने लिए प्यार और विश्वास देखना चाहता हूं । जो आपकी आंखों में पापा के लिए है ।

0 टिप्पणियाँ