शिक्षा में परिवर्तन देखो,अजब गजब सा मापन देखो,
बिना कापी और बिना पेन के,छात्रों को अध्यापन देखो !

अब हम तो कहलाते बुद्धू,रात दिन जो पढ़े पढ़ाए,
दिन कटता था कक्षाओं में,रात कटती नोट्स बनाए!

टाइम टेबल के आते ही,और चौकन्ने हो जाते थे,
प्रैक्टिकल परीक्षा में ,फाइलें खूब सजाते थे!!

अब किताबें भी हुई नदारत,मोबाइल में सब हुआ समाहित,
ना शिक्षक की डांट डपट है,ना छात्रों की हुई शरारत!!

कानों में लगा तार घूम रहे,पढ़ने का ढोंग कर रहे,
ऑनलाइन चल रही क्लास हमारी,बता बता कर धौंस भर रहे!!

बिना परीक्षा पास हो रहे,डिग्री की बौछार कर रहे,
छात्रों सा अनुशासन गायब,घर में बैठे मौज कर रहे!!

ज्ञान की दुर्गति कर रहे,इशारों में नकल कर रहे,
पाठयक्रम का पता नहीं,प्रश्नपत्र लीक कर रहे!!

गजब हो गई शिक्षा दीक्षा,बस नाम की रह गई परीक्षा,
फीस भरो और डिग्री पाओ,पढ़ाने की अब बची ना इक्छा!!
स्वरचित, मौलिक, सर्वाधिकार सुरक्षित ----- 
         कीर्ति चौरसिया
     जबलपुर (मध्य प्रदेश)