जिनके उत्सर्ग के फलस्वरूप,
आज हम आज़ाद हुए।
नमन उन वीर शहीदों को,
जो देश के लिए कुर्बान हुए।
उनके चरणों में नतमस्तक हो,
उनकी कृतज्ञता का आभार करें।
पूजे जाएंगे वे तब तक,
जब तक गंगा में जलधार रहे।
व्यर्थ नहीं जाने देंगे हम उनकी कुर्बानी को।
सीमा पर न घुसने देंगे कभी शत्रु की सेना को।
आज़ाद चंद्र, मंगल पांडेय,
तात्या टोपे खुदी राम बोष।
जिंदा है आज दिलों में आज भी सबके,
गूँजते हैं उनके जय उद्वोष।
जब तक रहेगी ये वसुंधरा
नभ और सूरज चाँद रहेंगे।
यशकीर्ति रहेगी दीप्तिमान,
नमन हे भारत के अभिमान।
शत शत नमन , स्नेहिल नमन,
करते तुम्हें श्रद्धा सुमन अर्पण।
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स्नेहलता पाण्डेय'स्नेह'

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