कुछ पल तो मुझे फिर से मुस्कुराने दे !
गुजरते वक्त की मौजो को ठहर जाने दे !!
गुजरते..........
इतनी जल्दी हकीकत से रूबरू यूं न कर !
समेटकर बिखरे अश्कों की माला तो बनाने दे!!
गुजरते........
मेरे हिस्से मे प्यार की बरसात नहीं है !
ओस की बूंदों से प्यास तो बुझाने दे !!
गुजरते ...........
चलो छेड़ दें फिर से कोई बातें पुरानी !
अल्फाज नये उन बातों में जुड़ जाने दे !!
गुजरते .............
गिले-शिकवे तो दफन होंगे दिल में तेरे !
कुछ अपनी सुना,कुछ मुझे अपनी सुनाने दे !!
गुजरते ..........
चांद क्यों झांक रहा बादलों की चिलमन से !
मेरी आंखों की दरिया में उतर जाने दे !!
गुजरते .........
तारों की बारात लेकर आजा बांध कर सेहरा !
इस विरहन को सुहागन तो बन जाने दे !!
गुजरते ............
मुझे खबर है हक नहीं तुम पर मेरा !
अपने एहसासों पर थोड़ा सा हक जताने दे !!
गुजरते .............
.....✍️पिंकी मिश्रा
भागलपुर बिहार ।

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