कितना सुहाना लगता है रात पूर्णिमा का
बिखरी होती है चाँदनी हर तरफ खिला होता है चाँद
बहुत प्यारा नज़ारा होता है उस चमकते आसमान में
मिलती होती है चकोर चाँद से संग तारों के बारात
गम में डूबे दिल को भी राहत सा है मिल जाता
जब दिख जाता है चाटकती चाँदनी के संग चाँद
रात के तन्हाई में जो नींद आँखों से हो कोसो दूर
दिल बेचारा ज़ब होजाता है तारे गिनने पर मजबूर
तड़प उठता है दिल सिने में देख तन्हाई ऊन तारों का भी
होती है ज़ब ज़ब आसमानो पर दर्गीश की रात
जब लाख चाह कर भी ना हो दीदार महबूब की
ढूंढ़ती है नैना आसमानो में शायद दिख जाए मेरा चाँद..!!
🌹🌝🌹🌝🌹🌝🌹🌝🌹🌝🌹🌝🌹🌝🌹🌝🌹🌝🌹
नैना....✍️✍️✍️

0 टिप्पणियाँ