आज थाने में इंस्पेक्टर विजय के सामने बहुत अजीब सा केस आया था,एक किशोर उम्र का लड़का हांफता हुआ थाने पहुंचा और कहता है कि ,उसने अपनी दादी का कत्ल कर दिया है,आप मुझे गिरफ्तार कर लें।

इंस्पेक्टर विजय  तुरंत घटनास्थल पर उस लड़के के साथ रवाना हुए।
वहां वास्तव में एक 70 साल की वृद्धा जमीन पर लेटी थी ,सर से रक्त स्राव हो रहा था।तुरंत हॉस्पिटल ले जाया गया ,वहां उसे मृत घोषित कर दिया गया।

किशोर को तुरंत थाने लाया गया,उसकी मां कमला रोती बिलखती अपने बेटे को छुड़ाने थाने पहुंची।
इंस्पेक्टर की पूछताछ में उसने बताना  शुरू किया _
सर मैं अपने  माता पिता और दादी एक साथ रह रहा था । मां  दूसरे के घरों में झाड़ू पोछा करती थी,पिता शराबी था। मां से शराब के पैसे मांगता और पैसे न मिलने पर मुझे और मां को बहुत मारता ।

मेरा  बाल मन घृणा,और क्रोध से भर उठता,लेकिन  क्रोध की घूंट को पी लेना मेरी मजबूरी थी।

धीरे धीरे हताशा और कुंठा ने जन्म लेना शुरू कर दिया , मैं  गुमशुम रहने लगा ,स्कूल में भी किसी से नहीं बोलता ,मास्टर सवाल पूछते लेकिन मैं बता न पाता।

विशेषकर महीने की पूर्णिमा और अमावस्या के दिन मैं बहुत बेचैन हो जाता ,बार बार  आत्महत्या का ख्याल आता ,लेकिन खुद पर संयम रखते मैं उम्र का पड़ाव पार कर रहा था।

अब मैं नवीं क्लास में आ गया था।

एक रात की बात थी , मां ने दादी और मुझे  खाना खिला कर सुला दिया था,पिता अभी नहीं आए थे।
अचानक मेरी नींद तेज आवाज सुनकर खुल गई।
पिता मेरी मां पर चिल्ला रहे थे ,उनके उपर गंदी तोहमत लगा रहे थे। मैंने डर कर चादर में अपना चेहरा  छुपा लिया था।

मां प्रतिरोध कर रही थी ,तभी जोर के थप्पड़ की ध्वनि रात के सुनसान वातावरण में गूंजी।पिता ने मां पर लात घूंसों की बौछार शुरू कर दी थी।अब मुझसे लेटा नही जा रहा था , मैं उठा ,और पिता का हाथ पकड़ कर एक ओर झटक दिया।

शराब के नशे में लड़खड़ाते मेरे पिता एक ओर गिर पड़े।मैने मां को उठाया ,और उनसे लिपट कर रोने लगा ,हमारी सिसकियां भी  रात की नीरवता को चीर रही थी।

पिता के स्वाभिमान को ठेस लगी ,उन्हें लगा कि मैंने उनका हाथ कैसे पकड़ लिया।
वो लड़खड़ाते कदमों से उठे और बाहर चले गए।
मैने मां को मलहम लगाया ,और दोनों रोते रोते कब सो गए ,हमारी नींद अचानक बाहर हो रहे ,शोर गुल से टूटी।

हम दोनों दौड़ कर भागे तो ,लोगों ने बताया की मेरे पिता की लाश क्षत विक्षत हाईवे पर मिली है ,पुलिस उसे ले गई है।

दौड़े दौड़े हम हॉस्पिटल के मॉर्चरी पहुंचे ,कोई ट्रक उन्हें कुचल कर निकल  गया था।किसी तरह उनका दाह संस्कार किया गया।

अब हम खुश भी थे और नहीं भी,।बस जिंदगी पटरी पर लौट रही थी ।
पिता के जाने के बाद दादी, मां को बड़ी नफरत की दृष्टि से देखा करती थी ,उसे लगता था कि पिता की मौत के लिए मां जिम्मेदार थी ।

आज पूर्णिमा का दिन था,मेरे अंदर जैसे एक सैलाब सा चल रहा था।
दादी की रोज रोज की चक चक से में ऊब चुका था ,उनकी बातें मेरे कानों में जैसे नश्तर चुभोती थीं।
मां की तबियत कुछ खराब थी ,इसलिए सुबह चाय देने में देर हो गई,दादी ने आसमान सर पर उठा लिया।
एक तो किशोर वय ,रक्त मेरे नसों में उबाल मार रहा था, मैं दांत पीसते उठा ,और सिल का बट्टा उठा कर दादी के सर पर मार दिया,रक्त की पिचकारी फूट पड़ी , मैं घबरा गया  और थाने की ओर भागा।

इंस्पेक्टर विजय उसकी कहानी सुनकर सोच में पड़ गए,कई सवाल उत्पन्न हो रहे थे।

"क्या अपराधी बनाने में मां ,बाप दोषी नहीं हैं?
इसने बार बार पूर्णिमा और अमावस्या को अपने मूड बदलने की बात क्यों की,जबकि इसकी बातों से पता चलता है कि ये आम दिनों में ये शांत रहता था।"


उन्होंने उसे जुवेनाइल कोर्ट में पेश किया ।जुर्म कबूलने के कारण उसे सुधार गृह में भेज दिया गया।

सुधार गृह में इन बच्चों का मनोचिकित्सकों द्वारा सेशन कराया जाता है,इंस्पेक्टर विजय को पता नहीं क्यों इस केस में कुछ ज्यादा ही दिलचस्पी हो रही थी।
एक सप्ताह बाद वो सुधार गृह में पहुंचते हैं तो उनकी मुलाकात मनोचिकित्सक से होती है।राजीव की केस हिस्ट्री के बारे में जब इंस्पेक्टर विजय ने जानना चाहा तो कुछ चौंकाने वाले तथ्य सामने आए।
मसलन उसके मूड का स्विंग होना ,विशेषकर पूर्णिमा और अमावस्या को।

डॉक्टर ने बताया कि_ चंद्रमा सबसे ज्यादा हमारे करीब है और यह हमारे जीवन में काफी उथल पुथल लाता है।जिस तरह चंद्रमा समुद्र जल को उपर की ओर खींचता है और ज्वार भाटा उत्पन्न होता है।
आपको मालूम है कि हमारे शरीर में भी 85 प्रतिशत जल है ,पूर्णिमा के दिन जल की गति और गुण बदल जाते हैं।इस दिन चंद्रमा का प्रभाव काफी तेज होता है ,इन कारणों से शरीर के अंदर न्यूरॉन सेल्स क्रियाशील हो जाते हैं ,और स्थिति में इंसान ज्यादा उत्तेजित या भावुक होता है।कमजोर मन वाले बहुत जल्दी प्रभावित हो जाते हैं।

इस दिन पेट की  उपापचय की क्रिया भी शिथिल होती है ,यही कारण है हमारे देश में पूर्णिमा व्रत ज्यादातर रखा जाता है।
यही इस राजीव के साथ भी हुआ,इसके बचपन से कुंठाएं इतनी ज्यादा थीं, कि इन दिनों में इसका मन बहुत कमजोर रहता और कोई भी सही निर्णय नहीं ले पाता।
इंस्पेक्टर ने आज कुछ नया जाना था।बाल अपराधी समय परिस्थिति,माहौल,इंटरनेट ,गलत संगत से अपराध की दिशा में अग्रसर होते हैं।