महाकाल की नगरी है उज्जयिनी ,
बाबा की निकली सवारी दर्शन करते नर नारी।
बाजे गाजे के साथ हैं निकले,
नाचे सब दे दे तारी।।
झूम झूम कर नाच रहे हैं,
बड़े भाग दर्शन भारी।
दूर-दूर से भक्त हैं आते,
छवि पर जावें बलिहारी।
आशा भाग बडो जागो है,
कृपा भई बाबा की ऐसी दर्शन मिले त्रिपुरारी।।
स्वरचित मौलिक अप्रकाशित सर्वाधिकार युक्त डॉक्टर आशा श्रीवास्तव जबलपुर

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