गतांक से आगे 👇



मृणाल की जिंदगी में खुशियों ने दस्तक दे दी थी । राहुल के प्यार और साथ ने उसकी जिंदगी में बहार ला दी थी । उसकी जिंदगी में  भी राहुल के रूप में खुशियां आएंगी उसने सपने में भी नहीं सोचा था । 
जीवन में अचानक से अत्यधिक खुशियां आ जाएं तो मनुष्य मन अंधविश्वासी डर में पड़ने लगता है । मृणाल के मन में भी ऐसी बातें आने लगती हालांकि वह इन विचारों को अपने पर हावी नहीं देती लेकिन वही ... मनुष्य का अंधविश्वासी डर .... विचार तों आ ही जाते ... । 

एक मृणाल ही नहीं थी जिसे यह डर था । घर में एक ऐसी   शख्सियत   भी    थी    जिनके   मन   पर   इन अंधविश्वासी विचारों ने पूरी तरह से अपना कब्जा जमा रखा था । बेटे की जिद की वजह से झुकना पड़ा ... पुरखों से चलती आ रही परंपरा को भी पुत्र मोह में तोड़ कर हमने शायद गलत किया... ना जाने विधाता हमें कौन सा दिन दिखाएं .... दिन भर राहुल की माॅं के दिलो-दिमाग में यही सारे प्रश्न चक्र की भांति घूमते रहते । 

घर में मृणाल के मृदु व्यवहार ने सबका दिल जीत लिया था सिवाय राहुल की माॅं के ... ऊपर से तों वह सामान्य रहने की कोशिश करती लेकिन कभी जब आंतरिक व्यथा उफ़ान का रूप धारण करती तों इससेे परिवार का कोई भी सदस्य नही बच पाता .. खासतौर पर मृणाल ... क्योंकि सारी बातों का केंद्रबिंदु तों वही थी । 

मृणाल को राहुल समझाता ... हर गुजरते लम्हों के साथ उम्मीद की छोटी सी लौ वह अपनी पत्नी में जगाएं रखता .. उसे यह विश्वास था कि एक दिन सब कुछ ठीक हों जाएगा और एक माॅं अपनी बेटी को गले लगा लेगी ... ऐसा होने में वक्त लगने वाला था और यही वक्त राहुल के पास नहीं था ... उसकी छुट्टियां समाप्त हो रही थी और साथ ही शुरूआत हो रही थी अपने परिवार और अपनी नई नवेली पत्नी को छोड़ कर जाने का विरह । 

कल मुझे हॅंसते हुए विदा करना है आपको .. आपकी ऑंखो में ऑंसू का एक कतरा तक मुझे मंजूर नहीं ... 
मैं   एक   फौजी   हूॅं  और   आप  उस  फौजी    की अर्धांगिनी ... मैंने फौज में सुना है फौजी की पत्नी को आधा फौजी कहा जाता है ...   फौजी की पत्नियां उनका सबल होती हैं ... उनके पीछे वही तों अपने परिवार के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करती हैं और अपनी पत्नी की बदौलत ही तो हम  फौजी  निश्चिंत  होकर देश के प्रति  अपने कर्तव्यों को पूरी निष्ठा के साथ निभा पाते हैं .. राहुल ने मृणाल की ऑंखो में देखते हुए कहा । 

आप .... राहुल को शरारत से ऑंखें तरेरते हुए देखकर मृणाल ने फिर से बोलना शुरू किया - " तुम यहाॅं की फ़िक्र मत करना और मेरी तों बिल्कुल भी नहीं ... तुमने मुझे जीना किसे कहते हैं ?... खुश होना क्या हैं ? .... इन दस दिनों और बारह घंटो में  पूरी तरह सिखा दिया .. मेरी ऑंखों में अब उदासी के लिए कोई जगह नहीं हैं इनमें तुम्हारे प्यार की एक ऐसी स्वर्णिम चमक हैं जिसे मैं कभी नहीं खोना चाहती । यही चमक तों मुझे तुम्हारे साथ का एहसास करता है ..यह तुम्हारी ही तों देन है जिसे मैं खोना नहीं चाहती ... जिस दिन मैंने इसे खो दिया उस दिन तुम समझना मैंने तुम्हारे साथ - साथ अपने आप को भी खो दिया " । आप निश्चिंत होकर जाएं  ... मेरी और यहाॅं की चिंता मुझपर छोड़ दो ... वक्त के साथ सब कुछ सही होगा ... मुझे भी यही लगता है ।  मृणाल अपने आपको कमजोर कर कुछ ऐसे  बोल नहीं बोलना चाहती थी जिससे राहुल अपने आप को भावनात्मक स्तर पर निर्बल समझे और अपने कर्तव्यपथ से विमुख हो जाएं । 

" यह हुई ना एक फौजी की बीवी वाली बात " ... राहुल ने मृणाल की हथेली को चूमते हुए कहा । 

मैंने तुम्हें कह तों दिया कि मैं अपनी ऑंखों में किसी भी तरह की उदासी आने नहीं दूंगी लेकिन तुम्हारे साथ के बिना ऐसा  करना बहुत ही मुश्किल होगा .. मृणाल ने सोते हुए राहुल की तरफ देखते हुए कहा । 

कल से यह जगह खाली रहेगी ... बहुत याद आओगे फौजी बाबू ...  मृणाल मुस्कुरा देती है । कुछ देर बाद राहुल को प्यार भरी नजरों से देखते हुए मृणाल सोचने लगती है - " मेरी जिंदगी में इतनी खुशियां भरने के लिए तुम्हारा अहसान मैं जिंदगी भर नहीं चुका पाऊंगी .. समाज और परिवार से लड़कर तुमने मेरे ऑंचल में खुशियां भरी है .. तुमने शादी से पहले एक बार भी नहीं सोचा कि मै तुमसे उम्र में बड़ी हूॅं .. तुमने सिर्फ मेरी खुशियां चाही .. इस बात को मैं कभी नहीं भूल सकती .. तुम्हारी खुशी के लिए मैं वो हर एक काम करूंगी जों तुम चाहते हो " । 

रात भर सोई नहीं आप ... मृणाल को अपनी तरफ देखते हुए देखकर ..  राहुल ने जगते ही कहा । 

ऐसा तों बिल्कुल नहीं है ... मैं थोड़ी देर पहले ही जगी हूॅं तों सोच रही थी कि तुम्हें कैसे जगाऊं ?? मृणाल ने अपनी चोरी पकड़ी जाने पर बचाव में कहा । 

आपकी ऑंखें देखकर आपके भीतर का हाल बता सकता हूॅं मेरी जान .. ऐसे तों सफेद झूठ मत ही बोलिए .. कहिए ! मैं कुछ गलत कह रहा हूॅं .. शरारती अंदाज में राहुल ने मृणाल से कहा । 

तुम तों जादूगर निकलें फौजी बाबू ... जब भी मिले मेरी ऑंखो के रास्ते मेरे दिल की बात जान ली .. अब तो हर वक्त तुमसे बचकर ही रहना पड़ेगा .. मृणाल ने भी शरारती अंदाज में ईट का जवाब पत्थर से दिया । 

कब तक बचेंगी ? मैं तों आज से हर रोज आपके सपने में जों आने वाला हूॅं और बचना तों आपकों अभी भी नहीं है .. मृणाल को अपनी तरफ खींचते हुए राहुल ने शरारत से कहा । 

मृणाल तन और मन से अपने फौजी बाबू के प्रति समर्पित हों चुकी थी ... दोनों का ही हाल एक जैसा था .... कमजोर पलों को अपने ऊपर हावी करके दोनों में से कोई भी ना तों खुद ही कमजोर होना चाहता था और ना ही अपने साथी को निर्बल होने देना चाहता था । 

मृणाल ने राहुल से किया वादा बखूबी निभाया था । 
अपने दिल की पीड़ा को उसने ना ही अपने होंठों पर आने दिया और ना ही अपनी ऑंखों में ही । अपने फौजी बाबू को उसने मुस्कुरा कर विदा किया था .. ऐसा कर उसने एक फौजी की पत्नी का पहली बार फर्ज निभाया था लेकिन यही फर्ज दुनिया वालों के लिए तानों का सबब बन गया जिसका जवाब भी मृणाल ने सिर्फ मुस्करा कर ही दिया था । 


राहुल को गए एक महीना होने वाला था .. सब कुछ वैसा ही चल रहा था जैसा राहुल छोड़ कर गया था .. 
सब्जी काट कर उठने के क्रम में मृणाल गिर ही पड़ती अगर भाभी ने उसे पकड़ ना लिया होता ... अपने आप को संभालों ... देवर जी होते तों मैं मानती कि उनकी गोद में गिरने की ख्वाहिश में तुमने ऐसा किया हों लेकिन यहाॅं तों मैं थी ... कहते हुए भाभी ने मृणाल की चुटकी ली । 

भाभी ! पता ही नहीं चला कि मेरा सिर कब चकरा गया और आपने एक अच्छा सुझाव दिया है अपने देवर जी की गोद में गिरने का ... जब भी फौजी बाबू आते है सबसे पहले यही करने की कोशिश करूंगी .. अपने सिर को एक हाथ से पकड़ मृणाल ने मजाक का जवाब मजाक में ही दिया । 

भाभी से ही हॅंसी - मजाक और काम में ही मृणाल का अधिकांश समय बीतता साथ ही वह हरसंभव प्रयास करती जिससे माॅंजी के दिल में अपने लिए थोड़ी जगह बना सकें । दोनों में सिर्फ औपचारिक बातें ही होती । ऐसे में राहुल और भाभी मृणाल की हौसला-अफजाई करतें और उसे वक्त का इंतजार करने को कहते । 

दूसरे दिन सुबह से ही मृणाल का जी मिचलाना शुरू हो गया । ब्रश करने से लेकर नाश्ता करने के बीच उसे कई बार इसका सामना करना पड़ा । भाभी अपनी मर्जी से कुछ कर पाने में असमर्थ थी । घर के सारे फैसले बड़े बुजुर्ग ही लेते थे । 

डाॅक्टर के पास जाने की स्वीकृति मिलते ही भाभी 
मृणाल को लेकर  निकल पड़ी। जब किसी चीज की उम्मीद ना हों और वह खुशी मिल जाए तों सबका आश्चर्यजनक रूप से खुश होना तों बनता ही है । 

आजकल के शादी - शुदा जोड़े बच्चे को इस दुनिया में लाने के लिए बड़े - बुजुर्गों से वक्त माॅंगते है लेकिन चलों ! कम से कम इन दोनों ने भगवान की मर्जी के ऊपर अपनी मर्जी तों नहीं थोपी ना ... अपने पति से कहती हुई राहुल की माॅं की ऑंखो में खुशी तैरने लगी जिसे उस दिन हर किसी की नजरों ने देखा । 

आज पहली बार घर - घर जाकर खुद से उन्होंने मिठाई बाॅंटी हालांकि राहुल की माॅं ने यह जिक्र किसी से नहीं किया कि उनके घर में नन्हा मेहमान आने वाला है । सभी को यही लगा कि बेटे की शादी की खुशी में महीने बाद मिठाई वितरण हों रहा है ।

क्रमशः 

" गुॅंजन कमल " 💓💞💗