हारी बाजी को जीतना हमें आता है
चानू, और सिंधु ने दो पदक भारत की झोली में डाल ओलंपिक में जैसे भारतीय खेलप्रेमियों में उम्मीद की किरण जगा दी।
परंतु उसके बाद लगातार भारतीय खिलाड़ियों की हार से ऐसा लगा अब कुछ नहीं हो सकता ,कई दिग्गज खिलाड़ी जैसे
मेरी कॉम के हारते ही भारत में खेल प्रेमियों में मायूसी छा गई ,लेकिन इस मायूसी में खुशी की किरण बन कर आई 23 साल की लवलीना ।
सबके मुरझाए चेहरे फूलों की तरह खिल गए।
69 kg वर्ग में जब लवलीना दुनिया के नंबर वन खिलाड़ी बुसेनाज सुरमेली के खिलाफ लड़ रहीं थीं,तो सामने वाले की उम्र और तजुर्बे का अंतर साफ नजर आया ,लेकिन अपने पंचों से लड़खड़ा देने वाली लवलीना ने दिखा दिया की सुनहरा भविष्य उसकी राह देख रहा है।प्रधानमंत्री,खेल मंत्री,अनेक बड़ी हस्तियों के साथ भारत के हर खेल प्रेमी ने दिल से उन्हें उनकी जीत के लिए बधाई दी है।
लवलीना बोरहोगेन देश के नॉर्थ ईस्ट के असम राज्य से आती हैं।संसाधनों के अभाव में पली लवलीना में जोश और जज्बा अपनी दो बहनों लीमा और लीचा को देख कर आया।वो दोनों किक बॉक्सिंग खेलती थीं।लवलीना ने भी अपनी शुरुवात किक बॉक्सिंग से की।पिता की टिकेन में छोटी सी दुकान थी ,आमदनी बहुत कम ,संघर्ष ज्यादा ,शुरुवाती दिनों में उसके पास ट्रैक सूट भी नहीं था।
लबलीना का रुझान कुछ दिनों बाद किक बॉक्सिंग को छोड़ बॉक्सिंग की ओर हो गया।
स्कूल की पढ़ाई के दौरान हीभारतीय खेल प्राधिकरण की तरफ से बॉक्सिंग का फ्री ट्रायल कराया गया जिसमें लवलीना ने भाग लिया और चयनित हुई।2012 से उसे बॉक्सिंग की ट्रेनिंग देने शुरू हो गई।कहते हैं ना अनगढ़ मिट्टी से सुंदर सुंदर कलाकृतियां तैयार हो सकती हैं।
लवलीना की योग्यता को पहचाना पोदोम बोरो ने ।लवलीना की रोल मॉडल थी मेरी कॉम।
इंटरनेशनल बॉक्सिंग की ट्रेनिंग उसने विमेन बॉक्सिंग कोच शिव सिंह से ली।
2017 में अपना पहला इंटरनेशनल डेब्यू उसने कजाकिस्तान में किया 75kg कैटेगरी में ब्रॉन्ज मेडल जीत कर।
अपने इंटरव्यू में ने लवलीना ने कहा ,उनका सपना गोल्ड का था ।
सपने ही तो एक खिलाड़ी को सोने नहीं देते जब तक वह अपनी जीत का परचम नहीं फहरा देता ,अपने लिए और अपने देश के लिए।
जय हिंद।

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