करके तेरी इबादत
पूर्णता पा जाती हूँ

भज पल पल तेरा नाम
हर पीड़ा भूल जाती हूँ 

तेरी कृपा तले रहकर 
ठंडी बयार बन जाती हूँ

तेरे रंग में रंग कर प्रभु 
प्रेम का मर्म समझ जाती हूँ 

खुद को जानूँ तेरे चरण की धुलि  
जीवन का मर्म समझ जाती हूँ 
आरती झा(स्वरचित व मौलिक) 
दिल्ली 
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