शब्दो में कभी जिसे बयां नहीं कर पाती
नाहीं कभी लिख पायी किसी शायरी में
कहाँ से लाते हो इतना गहरा प्यार मेरे लिए
सोचती रहती हूँ मैं बैठे बैठे तन्हाई में....!!
कभी खुद को तुम बुरा मत कहना
जो भी हो जैसे भी हो खुद को कभी मत बदला
तुम जो बदल गए तो जिउ गी कैसे
सोचती रहती हूँ मैं बैठे बैठे तन्हाई में....!!
हैंरान क्यूँ होजाते हो अक्सर मेरी बातो से
वाकिफ जो हूँ मैं तेरे हर जज्बातों से
नाजाने तुम इतने क्यूँ सबसे अलग लगते हो
सोचती रहती हूँ मैं बैठे बैठे तन्हाई में....!!
जितना भी प्यार तुम्हे दीखता हैं मेरी आँखों में
तुम से ही सिखा दिल ने निभाना वफ़ा हर साँसो से
जाने कोई सी डोर हैं जो खींच लेजाती हैं मुझे तेरी ओर
सोचती रहती हूँ मैं बैठे बैठे तन्हाई में....!!
बहुत खास पल होती हैं मेरी ज़िन्दगी की
जो कुछ पल साथ हम गुजारा करते हैं
कैसे कटेगी ज़िन्दगी तुम्हारे बिना इस नैना की
भर आती हैं आँखे जब भी मैं रहती हूँ तन्हाई में.....!!
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