शिव लेकर तेरा नाम
बनते जाए मेरे काम
तेरे द्वार पर आए दाता
मिल जाए हर मुकाम
झुका मस्तक शिव चरण में
आए हैं भक्त तेरे शरण में
वाणी जो निकले हो मधुर
तुम्हीं बसो शंभू अंतःकरण में
सत्पथ पर चलूँ ऐसा मान देना
सत्यम शिवम सुन्दरम सा अरमान देना
हर हर महादेव के हर नाद में
छवि अपनी देदीप्यमान दिखाना
काशी के वैरागी मंगल कर्ता तुम
अजर अविनाशी मृत्युंजय भी तुम
भक्तों के कृपानिधि उद्धारक तुम
बन जाओ हर पल के साथी तुम
आरती झा(स्वरचित व मौलिक)
दिल्ली
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