जब व्यक्ति करने के लिए कुछ और आया हों और उससे हों कुछ और जाएं तों समझ लेना चाहिए कि यहाॅं दिल ने दिमाग से बाजी मार ली हैं। सुजाॅय आज खुद से ही सवाल कर रहा है :- 
" मेरे सामने शर्त के साथ - साथ डैडी ने अवसर भी तों रख दिया हैं और इसका अगर मैंने फायदा नहीं उठाया तों मेरी आने वाली जिंदगी नर्क बन सकती है लेकिन अगर मैंने अरण्या जैसी नेक दिल लड़की को खो दिया तों जिंदगी भर  पछताता रहूंगा । अरण्या शादी के लिए ना नहीं कह सकती अगर उसने इंकार कर दिया तों यह मेरे प्यार की हार होगी । प्यार .. मुझे किसी से पहली नज़र में प्यार कैसे हो सकता है ? जिस लड़की से मैं पहली बार मिला , उसे सही ढ़ंग से मैं जानता तक नहीं उससे प्यार ...  लेकिन अरण्या में कुछ तों बात जरुर है जों वह पहली नजर में ही मेरे ऑंखो के रास्ते दिल में उतर गई है । मैं शर्त के मुताबिक गया तों था लेकिन कतई नहीं चाहता था कि इस शहर के सबसे बड़े बिजनेसमैन की बेटी से मेरी शादी हों और आज देखो ! मैं यह सोच कर परेशान हो रहा हूॅं कि वह मुझसे शादी के लिए इंकार ना कर दें । यह मेरे जज़्बात मुझे किस ओर लें जा रहें हैं मुझे खुद ही समझ नहीं आ रहा हैं । 

शिविका अपने काॅलेज के कैंटीन में बैठी अरण्या का इंतजार कर रही है । उसे उस लड़के और अरण्या के बीच हुई डेट के बारे में जानना है ताकि  पापा के पूछने पर वह उन्हें उस लड़के के बारे में अरण्या द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर बता सकें । सामने से आती अरण्या को देख उसने अपने दाहिने हाथ को ऊपर की तरफ हवा में हिला कर कैंटीन में अपनी उपस्थिति अरण्या को  दर्ज कराई । 

' हाय अरण्या ! कैसी रही आज की पहली डेट मेरे माल के साथ ?'   शिविका ने मुस्कराते हुए  कुर्सी पर बैठने ही  जा रही अरण्या से  पूछा । 

' वह तेरा माल है  तो मुझे क्यों भेजा डेट पर ?  खुद ही चली जाती ।'   अरण्या ने कुर्सी पर बैठते हुए कहा। 

' अरे यार ! तुम तो मज़ाक भी नहीं समझती मेरी । जानती तों है मुझे , जब भी मैं ज्यादा ही खुश रहती हूॅं मजाक करने में मुझे मज़ा आता है । खैर छोड़ ! वह डेट वाला लड़का कैसा था ? उसने तुमसे अच्छे से तो बात की ना ?  तुझे उससे मिलने में कोई परेशानी तों नहीं हुई ? ।'     शिविका ने अरण्या से लगातार सवाल पूछने शुरू कर दिएं । 

' थोड़ा सांस तों खुद लें लें और मुझे भी लेने दें , जब से आई हूॅं तब से मेरे दिमाग को जोरदार झटका दिए जा रही है ।' अरण्या ने कहा । 

' आज मैं थोड़ा ज्यादा ही खुश हूॅं , काॅलेज प्रशासन ने हमारी मांगों को मंजूरी दे दी है । अब बस लिखित तौर पर लागू कराने की देर है, इसके लागू होते ही हजारों विद्यार्थियों को भाषा संबंधी समस्याओं का सामना नही कर और विद्यार्थियों की तरह ही अपने मन की भाषा चयन करने का अधिकार होगा । इसी बात पर कुछ मीठा और नमकीन हों जाएं ।' शिविका ने मुस्कराते हुए कहा । 

' तुम्हारी खुशी मेरी खुशी हैं  शिबू । आज तक मैंने तुम्हारे अलावा किसी और को अपना दोस्त नहीं बनाया क्योंकि तुम नहीं चाहती थी कि हमारी दोस्ती के बीच में कोई भी आएं । तुम मेरी दोस्त , हमदर्द और मेरी सुख - दुख की साथी रही हों । तुम पर मुझे अपने आप से अधिक विश्वास है और यही  वजह है कि मैंने तुम्हारा हमेशा ही साथ दिया है और तुमने भी तो हमेशा ही मेरे सपनों को पूरा करने में मेरी मदद की हैं और आज तक करती आ रही हों ।'  अरण्या ने भावुक होते हुए कहा । 

' मेरी भावुक बहन ! ऐसा ना हों कि भावुकतावश हम दोनों ही रोने लगें और कैंटीन में सब हमें ही देखने लगें और कहने लगें कि देखो ! उस शिविका को जिसने काॅलेज प्रशासन को खून के ऑंसू रूलाने में कोई कसर नहीं छोड़ी वह रो रही है । इससे  पहले  कि यह सब हों हम जिस काम के लिए मिलने आएं हैं उसे पूरा करते हैं ।'    शिविका ने  चुटकी लेते हुए कहा । 

शिविका और अरण्या आज सुजाॅय के साथ हुई डेट के बारे में बातें करने लगे । अरण्या ने अपने साथ घटित सारी बातों को शिविका के सामने रख दिया और यह भी कि गलती से उसने अपना नाम सुजाॅय को बता दिया था । बाद में उसने बातें संभालते हुए घर के नाम और स्कूल - काॅलेजों के नाम में उलझा तो  दिया था लेकिन उसे डर था कि कहीं वह लड़का अपने पापा के सामने यह सारी बातें ना रख दें । 

अरण्या की बातें सुन शिविका के माथे पर शिकन तो आई लेकिन उसकी  आदत के अनुसार यह शिकन  उसके  माथे पर बहुत देर तक रह नहीं पाई । वह मुस्कराते हुए कुछ सोच रही थी । इस तरह शिविका को खुद में ही मग्न देख अरण्या से रहा नहीं गया उसने पूछा :- " यहाॅं मुझे यह डर है कि हमारे द्वारा किए जा रहे  इस कांड की थोड़ी सी भी भनक अगर तुम्हारे पूज्य पिता श्री  और मेरे आदरणीय अंकल जी को लग गई तों मेरा क्या होगा ?  तुम तो उनकी खुद की बेटी हो वह तुम्हें एक तमाचा मार छोड़ देंगे लेकिन मेरा क्या होगा ?  मुझे तो वें जिंदा ही नहीं छोड़ेंगे । मेरे बाद मेरी माॅं का क्या होगा ?  उसका मेरे सिवा कोई है भी तो नहीं और तुम हों कि अपने में ही मग्न मुस्कुराएं ही जा रही हों ? 

' जैसा तुम सोच रही हो ना बहन , वैसा कुछ नहीं होगा । तुम्हारी शिबू जब यहां  इस काॅलेज में इतने सारे विद्यार्थियों की समस्याओं को चुटकियों में समाधान  कर सकती  है तों  क्या वह अपनी खुद की समस्या को   यूं ही जाने देगी ?  यह बात पापा तक कभी भी  नहीं पहुॅंचेगी । मुझ पर भरोसा रखो और निश्चित होकर यहां बैठी रहो और देखती जाओ शिविका दि ग्रेट के बेस्ट प्लान को ।'  शिविका ने अरण्या के कंधे पर हाथ रख कहा । 

क्रमशः 

" गुॅंजन कमल " 💗💞💓