पूर्णिमा     की   रात में 
चलों कुछ देर साथ चलें 
कहीं पर साथ बैठें और 
एक-दूसरे से बात करें । 


     तन       और      मन       दोनों        से       ही 
   अपने  इस   अधूरे   रिश्ते    को  स्वीकार    करें 
  पलको के किनारों पर झूल रही हमारी स्मृतियों को
चलों      एकबार      फिर       से       याद        करें । 


पूर्णिमा के इस  चमकीले  उजालों  में 
सर्दियों     की    इन   सर्द     रातों    में 
साथ गुजारे उन बेशकीमती लम्हों को 
हम-दोनों मिलकर दिल में आबाद करें । 


                                             धन्यवाद 🙏🏻🙏🏻


" गुॅंजन कमल " 💓💞💗