नटवर नागर नंदा
फसा है मोह का फंदा
करत फिरत हम धंधा
विनती करत है बंदा
श्याम सुंदर गोविंदा
जोड़ दोनो हाथ खड़ा है बंदा
राधा जी का भाल चमकता
बिजुरी पड़े काहे नंदा
श्याम सखी के नैनन चंदा
राधा प्यारी गोविंदा।
संध्या पंवार
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