बागों में बहार है ,_हां है,।
तुमको मुझसे प्यार है ,_हां है।
प्यार का इजहार करते दो प्रेमी ,मिलते बातें करते भविष्य के सपने बुनते,सचिन और नंदा।
नंदा और सचिन एक दूसरे से प्यार करते थे।
एक दिन नंदा ने सचिन से कहा _सचिन कब तक हम यूं ही मिलते रहेंगे,अब  शादी कर लेते हैं।
यही बात तो मुझे अंदर ही अंदर खाए जा रही है, कि मां  को हमारा रिश्ता मंजूर होगा  भी की नहीं?_सचिन ने कहा।

बात तो करके देखो,पहले ही किसी बात का अंदाज क्यों लगा कर हार मान लेना_नंदा ने कहा ।
सचिन ने मां से बात की। मां ने पहले प्रतिरोध किया फिर मान गई ,बेटे की खुशी में ही उनकी  अपनी खुशी थी।
उन्होंने कहा _ शाम को नंदा को लेते आना ,मैं उसको देख लूं ,फिर उनके परिवार के साथ बात कर लूंगी।
सचिन मालती  देवी  का  इकलौता पुत्र  था। बहुत कम उम्र में ही वे विधवा हो गई थीं,सचिन को बहुत संघर्षों से पाला था।इसलिए सचिन अपनी मां को नाराज नहीं करना चाहता था।

मालती देवी ने नंदा को देखा तो पहली ही नजर में उन्हें वह पसंद आ गई ।
फिर  सचिन और नंदा की शादी हो जाती है।
मालती देवी बहुत खुश थी ,आधुनिक होने के कारण उसे टेक्नोलॉजी का भी अच्छा ज्ञान था।वह चुटकियों में घर बैठे सारे काम निपटा दिया करती थी।

उसे मोटरसाइकिल भी चलाना आता था।कभी कभी वो सचिन को पीछे बिठा पिक्चर देखने भी चली जाती थी।
मोहल्ले की औरतें देख देख जला करती  ,और आपस में  कानाफूसी किया करती थी_क्या जमाना आ गया है ,!
हमारी भी बहुएं हैं, सचिनवा तो जैसे लंदन से लेकर आया है,न सर पर पल्लू,न सिंदूर लगाती है ,न चूड़ी,बड़ी मॉडर्न बनी फिरती है।
अरे मालती की सुनती कहां होगी? 

मालती देवी ने जब ये सब बातें सुनी तो उन्हें बहुत बुरा लगा ,उन्हें नंदा के रहन सहन से कोई दिक्कत नहीं थी लेकिन लोगों को थी।
बल्कि नंदा की मदद से वो मोबाइल भी चलाना सीख गई थी,अपने मायके वालों से घर बैठे ,वीडियो कॉल भी कर लेती।
उन्होंने नंदा को बुलाया _बेटी तुझे मेरी कसम है , तू अब से  मोटरसाइकिल नहीं चलाएगी ।सचिन के साथ कहीं जाना हो तो  चली जाना। 

नंदा अवाक थी, कि सासू मां ने आज तक तो कुछ नहीं कहा ,आज क्या हो गया?
फिर भी उसने कुछ नहीं पूछा ।और कहा_ठीक है मां ,आप जैसा चाहती हैं ,वैसा ही करूंगी।
सुनो मैं 4 दिनों के लिए दिल्ली जा रहा हूं_सचिन ने कहा।
सचिन को टूर के सिलसिले में बीच बीच में दो चार दिनों के लिए बाहर जाना पड़ता था।
और सचिन चला गया।
दूसरे दिन वाहन एसोसिएशन की  देशव्यापी हड़ताल  थी।
नंदा अपने कमरे में थी,नाश्ता निपट चुका था।मालती देवी को चाय पीने की इच्छा हुई तो उन्होंने नंदा को बोलने के बजाय खुद ही चाय बनाना उचित समझा , वे रसोई में गई और अपने और नंदा के लिए चाय बनाने लगी।
चाय लेकर आते ही उनका पांव फिसला और वे धड़ाम से फर्श पर  गिर गईं ।नंदा अपने कमरे से दौड़ी।उसने देखा ,मालती देवी नीचे अचेत गिरी पड़ी थीं,सर से बहुत  खून बह रहा था।
नंदा घबरा गई ,उसने  तुरंत एंबुलेंस ,टैक्सी बुलाने के लिए फोन घुमाया ,गाड़ियों की हड़ताल  के कारण गाड़ी नहीं  मिली,और एंबुलेंस  वालों का फोन बार बार व्यस्त बता रहा था।

आखिर नंदा ने सास की कसम तोड़ उनकी जान बचाने के लिए मोटरसाइकिल उठाई,कुछ लोगों की मदद से मालती देवी को उठाया ,और अपने पीछे मालती देवी को  अच्छे से कपड़े  बांध कर बिठा कर हॉस्पिटल   ले गई।
वहां डॉक्टरों ने तुरंत इलाज शुरू किया ,दो दिन बाद मालती देवी होश में आई। सचिन भी आ गया था ।डॉक्टर ने कहा अगर सही समय पर इन्हें लाया नही गया होता तो शायद हमलोग इनकी जान नहीं बचा पाते।

सभी कृतज्ञ थे।मालती देवी ने होश आते ही ,सबसे पहले नंदा को बुलाया।
बिटिया आज तूने मेरी जान बचाई।मैं मोहल्ले वालों की बातों में आ गई थी।
नंदा ने मुस्कुरा कर कहा।
मां_
कुछ तो लोग कहेंगे
लोगों का काम है कहना।

सच कहा बेटी  तूने ,मेरी आंखें खुल गईं है,मुझे पता चल गया कि लोग किसी का अच्छा हो तो जलते हैं और बुरा हो तो मजा लेते हैं,इसलिए अपने बुद्धि ,विवेक से  आगे बढ़ना चाहिए _मालती देवी की आंखें खुल चुकी थीं।

समाप्त