जय जय महादेव त्रिपुरारी महिमा है अमित तुम्हारी।
तुम हो भोले भंडारी दर्शन करते नर नारी।।
तुम जल से खुश हो जाते भरते भंडार खाली ।
तुम सब के दुख हर्ता हो कृपा है तुम्हरी न्यारी।।
आशा की आस हैं प्रभु जी दया करो बलिहारी।

स्वरचित मौलिक अप्रकाशित सर्वाधिकार युक्त डॉ आशा श्रीवास्तव जबलपुर