""""""""""""""""""""''''''''''''''''''""""""""
जिस दिन से खुद से मोहब्बत हुई है ,
मेरी जिंदगी और भी खूबसूरत हुई है!
दूसरों की नजरों ने गैर समझा मुझे,
अब अपने नजरिये की जरूरत हुई है !
रूप यौवन का क्या है ढल जाएगा ,
मेरी सीरत से ही मेरी शोहरत हुई है !
मुस्कान आंखों तक पहुंचने लगी है,
मेरी खुशियां ही मेरी दौलत हुई है !
मैं आजकल खुद में जरा मशरूफ हूं ,
आईने से बात करने की आदत हुई है !
......✍️ पिंकी मिश्रा
भागलपुर बिहार

0 टिप्पणियाँ