सुनीता और प्रिया दोनो बहुत अच्छी सहेलियां थीं।दोनों स्कूल से लेकर कॉलेज तक साथ साथ थी।
दोनों की शादी हो गई तो उन्होंने एक दूसरे से फोन नंबर अदला बदली की,और ये वादा किया की दोनो के अगर बेटा बेटी हुए तो अवश्य शादी करेंगे।
फिर दोनों अलग शहर में अपनी अपनी दुनिया में व्यस्त हो गईं।
धीरे धीरे समय बीतता गया,दोनों मां बनीं।पहले सुनीता को बेटा हुआ और प्रिया को एक साल बाद बेटी।
दोनों फोन और सोशल मीडिया से एक दूसरे के संपर्क में थीं।
समय अपनी गति से चल रहा था ,दोनों बच्चे बड़े हो गए।प्रिया की बेटी फैशनेबल और आलसी थी ,किसी तरह ग्रेजुएशन किया।
वहीं सुनीता के बेटे ने एमबीबीएस कर लिया था , वहीं शहर से लगे एक सामुदायिक हेल्थ सेंटर में उसकी तैनाती हो गई।
प्रिया ने एक दिन सुनीता को वादे की याद दिलाई।
उसने कहा अब दोनों की शादी तय कर देनी चाहिए ।
सुनीता न चाहते हुए भी ,शादी को तैयार हो गई ,क्योंकि उसकी इच्छा थी कि उसकी बहू भी डॉक्टर हो,लेकिन प्रिया की बेटी तो दिन रात मेकअप और खाना खाने में लगी रहती थी।
सुनीता अपनी सहेली से मिलने गई।सामने से उसने कभी प्रांजल को नहीं देखा था।
प्रांजल देखने में बहुत सुंदर थी ,लेकिन उसे मेकअप का भूत सवार रहता ।बात चीत करके सुनीता को लगा कि प्रांजल भोली है ,और कुछ ज्यादा ही लाड प्यार में पली है।
उसने अपनी सहेली से वचन लिया कि ,मेरी एक शर्त है ,जब कभी मैं प्रांजल को उसके किसी गलती के लिए डांटू,फोन पर यह कितना भी तुझे बोले तू सुनेगी नहीं,और कभी उसका पक्ष लेकर मुझसे कोई बात नहीं करेगी ।,और प्रांजल से कहा घर की छोटी बड़ी का जिक्र हर वक्त मायके नहीं बताओगी,अब से हमारे घर की मान मर्यादा सबकी जिम्मेदार तुम हो।
प्रिया ने कहा _सुनीता मैं तुम्हारे और तुम्हारी बहू के बीच नहीं पडूंगी।
धूमधाम से दोनों के बच्चों का विवाह संपन्न हुआ।
प्रांजल और सुमित की जोड़ी बहुत अच्छी थी ।
प्रांजल जहां बोलने वाली ,वहीं सुमित शांत था।
शुरुवात में ज्यादातर काम सुबह का सुनीता ही निपटा देती ,प्रांजल जब उठती तो उसके जिम्मे केवल खाने का काम रहता।
सुबह सुमित और सुनीता के पति अपने अपने कार्यक्षेत्र निकल जाते ,सुनीता दोनों को टिफिन दे देती।
एक दिन प्रांजल ने कहा _मां ,आज खाना बनाने का मन नहीं कर रहा है ,बहुत दिनों से बाहर भी नहीं गए हम सब , बाहर से खाना ऑर्डर कर मंगा लूं क्या?
सुनीता ने कहा _तुम ठीक कह रही हो।मंगा लो।
प्रांजल खुश हो गई।
दोनों ने अपनी अपनी पसंद का खाना ज्यादा ज्यादा मंगाया ,ताकि शाम को भी बनाना न पड़े ।जब बाप ,बेटे आएं तो उन्हें भी वही परोस दिया जाए।
उस दिन से सुनीता को भी खूब आनंद आने लगा ।कहते हैं ना खरबूजा खरबूजे को देख रंग बदलता है ।सुनीता अब बहू के रंग में रंगने लगी।कहां वो उसे सुधारने का सोच कर घर लाई थी और अब वो भी उसके जैसी बनने लगी।
दोनों बाहर से खाना मंगा लेती , टीवी देखती और फोन पर दोस्तों के साथ गप्पे मारती ।
सुमित और उसके पापा आखिर परेशान हो गए ।
उन्होंने उन्हें सबक सिखाने का निश्चय किया।
एक दिन सुनीता को सुमित ने कहा _मम्मी ,पापा के दोस्त बड़ौदा में रहते हैं ,बीमार हैं उन्हें देखने जाना है ।पापा और मैं जा रहे ।
सुनीता ने कहा _हां जाओ ।
सुमित के पिता ने घर के खर्च के लिए 4 दिन के हिसाब से पैसे दे दिए।सारा सामान रखा ही था ,बस सब्जी ही लानी थी ,उसके लिए पैसा पर्याप्त था।
वे दोनों चले गए।दोनों खुश थी ,अब तो नाश्ते का भी टेंशन खत्म था।
4दिन बाद पैसे खत्म थे उम्मीद थी , कि अब दोनों लोग आ जायेंगे ,लेकिन सुमित का फोन आया कि मम्मी हमें और 10 दिन लग जाएंगे।
अब तो सास बहू के ऊपर जैसे पहाड़ टूट पड़ा।
पैसे खत्म थे ।सुमित और उसके पापा दोनो मजे में छुट्टी मना रहे थे,बड़ौदा से अहमदाबाद ज्यादा दूर नहीं था ,दोनों ने वहां के सभी पर्यटक स्थलों की सैर की।
इधर सास बहू के पास पैसे न होने की वजह से अब उन्हें रसोई की ओर प्रस्थान करना पड़ा।
बहुत दिनों के बाद रसोई दर्शन और अपने हाथों से बना खाना खा दोनों ही तृप्त हुईं।सुनीता ने हिसाब लगाया कि हम कितना उन तेल मसाले ,सेहत के साथ खिलवाड़ करने वाले खाने पर व्यय कर रहे थे ।
प्रांजल ने कहा _हां मां आप ठीक कह रही हैं।
सुमित और उसके पापा 10 दिनों के बाद जब लौटे तो ,घर का काया पलट था।सुनीता तो खाना बनाने में तेज थी थी ,प्रांजल का साथ मिला तो उसने सास बहू नाम का यूट्यूब पर अपना चैनल बना लिया था।
जिसके लिए आजकल घर में अच्छे अच्छे , हेल्दी खाने की चीजें बननी शुरू हो गई थी।
सभी खुश थे,विशेषकर सुमित और उसके पापा ,उनके ही कारण वे दोनों रास्ते पर आ गईं थीं,और अपनी जिम्मेदारी के साथ साथ भविष्य में इसी से पैसे भी कमाने वाली थीं।
समाप्त

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