हमारा देश पिच्हरतवां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। अवस्था बढ़ने पर ,व्यक्ति की जरावस्था बढ़ती जाती है ,परंतु भारत देश में दिन प्रतिदिन होते चहुंऔर विकास के कारण हमारी आजादी की अवस्था युवावस्था के सौंदर्य को बढ़ाती जा रही है ।
आज भारत औपनिवेशिक दासता को दूरकर, प्राप्त की गई आजादी का पर्व मना रहा है ।
जहां खौफ और क्रूरता अपनी सारी हदें पार कर जाती है, वहीं से हौसला जन्म लेता है ,इस हौसले की मिट्टी ने देश के स्वाधीनता संग्राम को शिखर पर पहुंचाने का अटल निर्णय ले लिया था ।
यह आजादी चुटकी बजाकर नहीं अपितु जान की बाजी लगाकर ली गई है ।
हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने, दिल्ली को अपने खून को बहाकर बचाया और लाल किले पर अपनी जीत का परचम लहराया ।
भारत में औपनिवेशिक दासता के विरुद्ध चला राष्ट्रीय आंदोलन स्व के भाव से प्रेरित था ,जिसका स्वधर्म ,स्वराज, और स्वदेशी के स्वरूप को प्रदान कर, पूरे देश को अपने साथ कर रहा था।
युगो युगो से भारत की आत्मा में बसा स्व अपनी संपूर्ण शक्ति के साथ स्वतंत्रता आंदोलन में प्रकट हुआ।
विदेशी शक्तियों ने भारत की आर्थिक ,सामाजिक, सांस्कृतिक और शैक्षिक व्यवस्था को पूर्णतया नष्ट कर दिया था ।
अपनी संस्कृति को पुनः जागृत करने के लिए भारत के जन्मे स्वाआंदोलन का स्वर स्थापित किया अपने मूल्यों की रक्षा के लिए स्वतंत्रता सेनानी बन गए ।
अंग्रेजों ने नरसंहार किया किंतु हमारे स्वतंत्रता सेनानी संघर्ष से पीछे नहीं हटे ।
1857 में स्वतंत्रता की लड़ाई में लाखों लोगों ने वलिदान दिया।
आज हमारा भारत देश विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, जिन लोगों ने भारत की सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा के लिए स्वतंत्रता के आंदोलन में अपना योगदान किया ,उन्होंने भारत के संविधान की रचना करते हुए,संविधान की प्रथम प्रति में चित्रों के माध्यम से रामराज्य की कल्पना और व्यास पुत्र तथा महावीर जैसे भारतीय व्याख्याताओं को चित्रित कर ,भारत के सांस्कृतिक प्रभाव को अक्षुण्ण रखने की कल्पना की।
आज हम स्वतंत्रता की 75 वीं वर्षगांठ मना रहे हैं ,यह अवसर उन बलिदानी देशभक्तों के प्रति सादर नमन करने का है ,जिनके त्याग और बलिदान के कारण हम स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में यथोचित विश्व में स्थान प्राप्त करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।सादर नमन है उन वीरों को ,उन संस्थाओं को ,और स्थानों को जिन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन को दिशा दी ,।
अब हमारा कर्तव्य बनता है,अपनी आने वाली पीढ़ियों को सजग करें और उनको स्वतंत्रता के पीछे पीढीयों की साधना और शताब्दियों तक बहाए गए आंसू ,पसीना ,और रक्त के प्रभाव को दिखाकर और आजादी के प्रति स्वतन्त्रता सेनानियों के समर्पण के प्रति गौरव,श्रद्धा से,और सम्मान पूर्वक सदैव अपने मन मस्तिष्क में सजाकर स्वतंत्रता का सम्मान करें।

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