स्पीच की चोरी करने के बाद मोहित आराधना के सामने जाने से डरने लगा था, साथ ही उसे यह अहसास हो गया था कि वह उससे कई ज्यादा होशियार और समझदार है, शायद उसका दिल आराधना की तरफ मुड़ चुका था, लेकिन अपनी झूठी शान और अकड़ उसे आराधना से माफी माँगने से रोक देती है......

        कुछ दिन बाद कॉलेज में एक वाद-विवाद प्रतियोगिता रखी जाती है, आराधना इस प्रतियोगिता को लेकर बहुत उत्साहित है, दूसरी तरफ मोहित को इसमें बिल्कुल भी रुचि नहीं होती, आराधना और उसके साथी कॉलेज के गार्डन में बैठे इसकी तैयारी कर रहे थे तभी मोहित और उसके कुछ दोस्त वहां आ गए.....!
     आराधना को खुश देखकर मोहित बेवजह ही खुश हो जाता था लेकिन दिखावे के लिए वह उसको तंग करने का मौका ढूंढता रहता था, तभी उसने एक कागज पर लूज़र्स लिखकर आराधना और उसके साथियों के बीच फैंक दिया लेकिन आराधना से पहले बीच में ही सपना ने वह कागज उठा लिया और उसे खोल कर देखा तो वह अपने गुस्से पर काबू नहीं कर पाई और उसने सभी के सामने मोहित की कॉलर पकड़ ली। 

दोनों के बीच बातचीत-

सपना:- तुम अपने आप को समझते क्या हो! तुम वही हो ना जिसने उस दिन कलेक्टर मैम को इंप्रेस करने के लिए आराधना की स्पीच चुराई थी और आज उसी को लूज़र बोल रहे हो, कुछ तो शर्म करो मोहित…

मोहित:- एक्सक्यूज मी, तुम अपने काम से काम रखो यह मेरे और उसके बीच की बात है... सो गेट लॉस्ट, मुझे तुम्हारे जैसी लड़कियों के मुंह लगने का कोई शौक नहीं है....

(गुस्से में) दफा हो जाओ.. इस बात पर सपना का गुस्सा उसके चरम पर होता है तभी आराधना आती है और मोहित के गाल पर एक जोरदार थप्पड़ मार देती है.... चारों और घोर सन्नाटा.... सब एक दूसरे को ताक रहे है इसी बीच आराधना सपना को देखते हुए.." तुम्हें मेरे लिए ऐसे लड़के के मुँह लगने की कोई जरूरत नहीं थी सपना, ऐसे लड़के कभी नहीं सुधर सकते....! आराधना सपना का हाथ पकड़ कर आगे बढ़ती है फिर मोहित को देखकर....' यू गेट लॉस्ट' बोलकर आगे बढ़ती ही है कि मोहित उसका हाथ पकड़ लेता है.... दूसरे हाथ को अपने गाल पर लगाते हुए-" जिस गाल पर आज तुमने थप्पड़ मारा है एक दिन उसी गाल पर तुम्हारे होंठ होंगे.. आई चैलेंज यू".....  न जाने क्यों आराधना उसकी बेहूदा बातों का कोई जवाब नहीं दे सकी और उसकी आँखे भी शर्मा गई वह वहाँ से निकल पड़ी... चलते चलते उसकी आँखों से आँसूओं की धार बहती जा रही थी, उसे समझ नहीं आ रहा था कि उसके साथ क्या हो रहा है, वह मोहित को थप्पड़ मार कर भी खुश नहीं हो पा रही थी, वह स्कूल से बहुत दूर एक झील के किनारे जा पहुँची.... चारों ओर इतनी सुन्दरता और शाँत वातावरण में उसका हृदय भी कुछ शाँत हुआ... कुछ समय बीत जाने के बाद पत्तों की सरसराहट और किसी के आस-पास होने की आहट से वह बैचेन हो उठी, अनजान जगह पर किसी का साथ भी नहीं था.... उसने आहट को अपने पास आते हुए महसूस किया, डर से उसने अपनी आँखे बंद कर ली....! अचानक एक लड़के की पुकार से वह उस और मुड़ गई और उस लड़के से चिपक गई वह इतना डर गई थी कि वह अपनी आाँखे भी नहीं खोल पा रही थी... "प्लीज आप मुझे मेरे स्कूल तक छोड़ देंगे.... इतना अँधेरा भी हो गया है....प्लीज....मुझे अँधेरे से बहुत डर लग रहा है... आराधना उसे और जोर से पकड़ते हुए रो पड़ी। 

    वह लड़का मोहित ही था, आराधना को अकेले झील की तरफ जाते देख रहा नहीं गया उससे.....की कहीं उसे कुछ हो गया तो... उसके अन्दर का ख्याल उसे वहाँ तक ले आया था, उसे जरा भी अहसास नहीं था कि आराधना इतनी डर जाएगी, उसके डर को कुछ कम करने के लिए उसने अपना हाथ आराधना के कंधे पर रखा और उसके हटने का इंतजार करने लगा.... आराधना को इतना सूकून शायद पहले कभी न मिला था, उसे कभी किसी ने इस तरह गले से लगाया ही न था। बेखबर आराधना मोहित की बाँहों में बाँहे डाल रोती रही, प्रकृति के अद्भुत वातावरण में दोनों की धड़कन एक दूसरे को सुनाई दे रही थी, कुछ देर बाद मोहित ने धीरे से उसका हाथ पकड़ उसे किनारे पर बैठाया, बहुत अँधेरा होने के कारण आराधना उसे पहचान नहीं पाई, दोनों झील किनारे बैठ गए आराधना की आँखों से अब भी आँसू आ रहे थे, मोहित ने आँसू पोंछा तो आराधना खुद को रोक ना पाई और बताने लगी-
      "पता नहीं उस पर क्या बीत रही होगी, मैं उसे मारना नहीं चाहती थी..... पर वह सपना से कैसे बात कर रहा था.. वह ऐसा क्यों करता है..….. मैंने उसका कुछ भी नहीं बिगाड़ा फिर भी वह हमेशा मुझसे नफरत करता है, लेकिन यह भी सच है कि मैंने उसको कभी कुछ बताया ही नहीं तो वह मुझे क्या समझेगा... कि जिससे हम प्यार करने लगते है और वही हमसे नफरत करें तो कितना दर्द होता है.... मोहित को तो जैसे अटैक आते आते बच गया.... वह एकटक आराधना को देखता रहा..... 'प्यार'... उसके मुँह से ये एक ही शब्द निकला था कि आराधना को अहसास हो गया कि ये मोहित ही है...  फिर से सन्नाटा......  धड़कने बेतहाशा बढ़ती रही!! दोनों एक दूसरे की आँखो में देखते रहे, आराधना मोहित की और बहुत प्यार भरी नजरों से देख रही थी..उसकी आँखों में आँसू की जगह प्यार का इजहार झलक रहा था, प्रश्न भरी निगाहें मोहित का जवाब सुनने के लिए आतुर थी.... मोहित ने आराधना के हाथ से अपना हाथ छुड़ाने की कोशिश की पर छुड़ा न सका... वह उसे देखती रही और देखते देखते दोनों एक दुसरे के बेहद करीब आ गए थे.. मोहित ने इसका फायदा उठाया और अपना गाल आराधना के होंठों के चिपका दिया, आराधना शर्मा गई वह उठ भाग खड़ी हुई और दोनों स्कूल पहुँच गए, रात भर आराधना मोहित और उसके साथ बिताए पलों को याद कर मुस्कुराती रही, वह मोहित को अपना गाल आगे करने को उसके प्यार की हाँ समझ रही थी, लेकिन सुबह एक शोर से उसकी नींद एक झटके में उड़ गयी.... विद्यालय में जहाँ देखो आराधना और मोहित की चर्चा जुबान पर थी,  लड़के आराधना को देख हंस रहे थे तो लड़कियाँ मुँह बिगाड़ रही थी..... 
........जानने के लिए जुड़े रहे।

क्रमश: