अन्तर्मन भी 
पीड़ा की पराकाष्ठा से विचलित
व्यथित कुछ खो जाने जैसा।।

जग का कल्याण राम से 
अपने ही राज्य अवध में सुबह
शाम कलरव करती युगों युगों से
सरयू की धाराएं ।।

बाबर की
बर्बरता क्रूर काल कुटिल घात
से शाश्वत राम मिथक जैसा।।

वर्षों के संघर्षों में जन्मा एक
योद्धा युग को पता नही राम जन्म
भूमि मुक्ति का मानव महापुरुष
युग नायक लोध कुल भूषण जैसा।।

छद्म स्वार्थ का युग संसार 
त्याग बलिदान संस्कृति सांस्कार बाबर की बर्बरता का कर  दिया हिसाब न्याय और न्यायधिशो जैसा।।

बाबर ने तोड़ा राम मंदिर मस्जिद बनवाया कल्याण प्रतिज्ञा जब तक बाबर के कदमो निशाँ मिट ना जाये तब तक विश्राम कहाँ आराम कहां भीष्म प्रतिज्ञा जैसा।।

कर्म सत्य, धर्म सत्य ,मर्म मर्यादा
सत्य ,सत्य सनातन सत्य युग ब्रह्मांड
कर्म योग भोग की भूमि जैसा।।

प्राणि प्राण के कर्म भोग का विराम
कल्याण कर्म की गूंज से स्वर्ग की
अनुगूंज गान जय जय श्री राम आया 
कल्याण स्वागत हो देवो जैसा।।

राम मंदिर अब सच्चाई यथार्थ चेहरे पर मुस्कान लिये शांत चित्त पूर्ण प्रतिज्ञा का युग पुरुषार्थ भाव
महापरिनिर्वाण मोक्ष मार्ग जैसा।।

नन्दलाल मणि त्रिपाठी पीतांम्बर 
गोरखपुर उत्तर प्रदेश