सावन में, आया रक्षाबंधन,
भाई बहिन, का त्यौहार,

तिलक, अक्षत लगाओ,
राखी, बंधवा लो भैया,

चरण छूकर, आशीष मांगे भैया,
बहिना मांगे, भाई का साथ,

दूजे दिन, त्यौहार कजलियां,
बड़े बूढों से, मिलता आशीष,

नौमी के दिन बौवें, गेहूं के दाने,
पाँच दौना भर, पूजें ढक देवें,

दूजे दिन राखी के, झुलावें झूला,
पूजें फिर, खौटें कजलियां,

सर्व प्रथम देवें, कान्हा जी को,
बड़ों को देके, पाते आशीष,

एक दूसरे को, देकर कजलियां,
खुशी का, करते इज़हार,

मिलना जुलना, पाना आशीष,
भारत की ये, संस्कृति है हमारी ।

     काव्य रचना-रजनी कटारे
          जबलपुर ( म.प्र.)