स्नेहा ने अगले दिन सलिल को भी साथ चलने को कहा,लेकिन सलिल ने कहा_ मुझे ऑफिस में बहुत काम है,और ये सब तो तुम आराम से कर सकती हो,बहुत दिनों से तुम्हारी शॉपिंग भी नहीं हुई है ,मौका है ,शॉपिंग भी कर लेना ।मिस्टर जोसेफ तुमसे शॉपिंग के गुण भी सीख लेंगे।
स्नेहा गुस्सा दिखाते चली गई।जिस होटल में मिस्टर जोसेफ रुके थे ,स्नेहा पहुंच गई उसने अपना नाम बता जोसेफ को बुलाने कहा।
तब तक मैनेजर आ गया उसने कहा_ मैम आपको सर कमरे में बुला रहे ।
स्नेहा ने कहा _उनसे कह दीजिए ,मैं यहीं वेटिंग एरिया में उनका इंतजार कर रही हूं।
मैनेजर ने जोसेफ से बात की तो_, उसने कहा मैडम को कुछ दिखाना है ,उन्हें कमरे में भेज दो।
स्नेहा को न चाहते हुए भी अंदर जोसेफ के कमरे में जाना पड़ा।जोसेफ ने दरवाजा बंद कर स्नेहा के साथ छेड़ छाड़ करनी शुरू कर दी।स्नेहा को ये सब अप्रत्याशित लगा।उसने पर्स से मिर्ची स्प्रे निकाल जोसेफ की आंख में झोंक दिया।
जोसेफ इसके लिए तैयार नहीं था वो चिल्लाने लगा।स्नेहा तुरंत दरवाजा खोल कर जल्दी से निकल गई।
बाहर जा कर तुरंत ड्राइवर से कह घर लौट आई ,और सीधे अपने कमरे में चली गई।
कमरे से कराहने ,चिल्लाने की आवाज सुन,होटल के स्टाफ कमरे की ओर भागे।
मैनेजर ने जल्दी डॉक्टर को फोन कर दिया ।
थोड़ी देर में भागा भागा सलिल घर आया ,उसने अपनी मम्मी से पूछा ,स्नेहा कहां है,उन्होंने कहा अपने कमरे में।
सलिल गुस्से से आग बबूला था।उसने स्नेहा को जाकर जोरदार थप्पड़ रसीद कर दिया।
और गुस्से से बड़बड़ाने लगा _तेरी इतनी मजाल तूने क्लाइंट की आंखों में मिर्ची ही झोंक दिया।
तू क्या थी ,तुझे सड़क से उठा कर महलों की रानी बनाया उसका ये सिला दिया ,बड़ी सती सावित्री बनी फिरती है।
स्नेहा की समझ में कुछ भी नहीं आ रहा था।ये सब क्या बोल रहा है सलिल।
सलिल गुस्से से कहता जा रहा था_
एक दिन किसी के साथ सो जाएगी तो इसका सतीत्व नष्ट हो जायेगा ,सबकी कीमत होती है स्नेहा जी।करोड़ों की डील पाने के लिए अगले को किसी कीमत पर भी खुश करना पड़ता है।
स्विट्जरलैंड मैं यूं ही तुम्हें नहीं ले गया था,वहां भी रात में तुम और किसी के साथ सोई थी उससे तुमने मुझे फायदा करवाया था।
और उस रात तुम्हारे कोल्ड ड्रिंक में नशे की गोली डलवाई थी ,जिससे रॉबिन के साथ तुम सोई थी।
तुमसे पहले ये काम मोहिनी भाभी भी करती थी ,पलक के पैदा होने के बाद उनका जाना कम हुआ।
स्नेहा ये सब सुनकर घायल शेरनी की तरह सलिल पर टूट पड़ी ,इतना बड़ा खेल मेरे साथ तुमने खेला।मैं तुम्हें छोडूंगी नहीं तुम्हें और पूरे परिवार को एक्सपोज कर दूंगी।
अच्छा !!सलिल बेशर्मी से मुस्कुराया_पुलिस के पास जाओगी,जो तुमने कमरे में कांड किया है उसका वीडियो है मेरे मोबाइल में और क्या सबूत है की मैंने तुम्हें इसके लिए कहा था ,ये कैसे साबित करोगी। मैं तो मासूम बन जाऊंगा कि मुझे तो तुम्हारे इन सब काम के बारे में कुछ मालूम ही नहीं, तुम अपनी मर्जी से ये सब करती थी।
इसलिए चुपचाप जैसा हम कहें करती रहो,वरना जान से भी जाओगी और इज्जत से भी,समझी।
स्नेहा सर पकड़ कर बैठ गई वह पूरी तरह से उन सबके चंगुल में फंस गई थी ।
आखिरकार उसने फैसला किया कि अब मैं किसी को अपनी अस्मत का सौदा करने नहीं दूंगी ,मैं पुलिस के पास जाऊंगी ।
और उस दिन वह घर से चुपचाप पार्लर जाने के बहाने निकली ,और सीधे पुलिस स्टेशन गई ,वहां इंस्पेक्टर ने रिपोर्ट लिखने से मना कर दिया,और स्नेहा के ससुर को खबर कर दी।
स्नेहा जान गई कि अब ससुराल वाले उसे ढूंढ कर छोड़ेंगे नहीं।उसने मार्केट से एक बुर्का खरीदा ,और पहन कर छोटी आय वाली बस्ती में एक मकान किराए पर लिया और वहीं रहने लगी।पर उस शाम जब वह निकली तो बारिश होने लगी ,और सलिल के गुंडों ने उसे देख लिया और गुंडों से बचने के लिए भागने के क्रम में वह विशाल की कार से टकराई थी।
वह अपनी सोच से बाहर नहीं निकलती अगर नेहा (विशाल की पत्नी) उसे झकझोरती नहीं।
नेहा ने कहा _
स्नेहा तुम हमारे घर रुक सकती हो क्योंकि बाहर तुम्हारी जान को खतरा है और यहां तो कोई तुम्हें नौकरी देगा नहीं विशाल की कंपनी की एक ब्रांच दिल्ली में है,वहां तुम्हारे नौकरी के लिए बात विशाल कर लेंगे।
स्नेहा ऑनलाइन भी जॉब देखने लगी।
रोजाना टीवी और अखबार में उसके पति और जेठ की खबर आ रही थी।
उनके खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं मिलने के कारण उन्हें रिहा कर दिया गया।
स्नेहा ने मेहा की ओर देख कर कहा_ये क्या हुआ? अब तो दोनों धड़ल्ले से अनैतिक कार्य करेंगे,उनको कैसे सजा मिलेगी?
नेहा ने कहा ,स्नेहा अब तुम्हें सबूत के साथ ही फंसाना होगा।उन्होंने सब जगह पैसे खिला कर क्लीन चिट ले ली है।
बस ,मीडिया के चिल्लाने पर आय से अधिक संपत्ति के लिए उनके बहुत सारे फर्मों और फैक्ट्री ,दफ्तर पर छापा पड़ा है ।
लेकिन भ्रष्टाचार बहुत है ,वहां भी ले देकर निकल जायेंगे।
कल हमारी संस्था की विधिक सलाहकार को मैं घर लेकर आऊंगी ,वो तुम्हें कुछ कानूनी दांव पेंच बताएंगी।
अगले दिन एडवोकेट रुचि आईं।उन्होंने स्नेहा से कहा _स्नेहा अगर तुम इंसाफ चाहती हो तो तुम्हें उनके खिलाफ सबूत इकट्ठा करना होगा।तुम्हारे पास दो रास्ते हैं या तो तुम जाकर उन सबसे माफी मांग लो,और सामान्य जीवन जीने की कोशिश करो ।धीरे धीरे उनका विश्वास जीतकर सबूत इकट्ठा करो,लेकिन इसमें भी रिस्क है , हो सके वो तुम्हें बंधक बना ले ,धीरे धीरे ड्रग्स देकर कमजोर कर ,तुमसे अपना काम करवाएं।इसकी संभावना ज्यादा है।
और मैडम दूसरा रास्ता _स्नेहा ने पूछा।
दूसरा रास्ता _तुम्हारी जेठानी है,अगर वो तैयार हो तो ।मुझे नहीं लगता वो मानेगी उसकी सबसे बड़ी कमजोरी उसकी बेटी है।
अब तुम सोचो तुम्हें क्या करना है स्नेहा।_रुचि ने कहा।
मैं उनलोगों को नहीं छोडूंगी,मैं कोशिश जरूर करूंगी _स्नेहा ने कहा।
स्नेहा अब सलिल का चेहरा भी नही देखना चाहती थी ,उसने मोहिनी से मिलने का मन बनाया।
मोहिनी पलक को छोड़ने और लेने स्कूल जाती थी।
स्नेहा बुरका रोजाना स्कूल जाती ,पलक पर नजर रखती ,मोहिनी के आने का टाइम नोट करती,लेकिन उसके साथ कोई न कोई रहता ,और घर से पलक के स्कूल आने ,जाने में सिर्फ 20मिनट ही लगते हैं,ऐसे में मोहिनी को समझाने में समय ज्यादा लग सकता था ,और मोहिनी उनके शक के दायरे में आ सकती थी।
इसलिए स्नेहा ने दूसरा रास्ता निकाला।
स्नेहा ने स्कूल की प्रिंसिपल से कह कर मोहिनी को पलक की प्रोग्रेस के लिए मीटिंग के लिए बुलवाया।
प्रिंसिपल ने स्नेहा के सामने फोन किया _हैलो मोहिनी जी बोल रहीं है ,मैं पलक की प्रिंसिपल बोल रही हूं।
जी मैं मोहिनी बोल रही हूं , बताइए क्यों फोन किया है।
कल आप मुझसे मिलने आ सकती हैं,पलक की पढ़ाई के विषय में आपसे बात करनी है_,प्रिसिपल ने कहा।
जी ठीक है_मोहिनी ने दूसरी ओर से हामी भरी ।
सारी प्लानिंग सही से चल रही थी ,अगले दिन मोहिनी आई ,स्नेहा,नेहा और रुचि पहले से मौजूद थे ,स्कूल के हॉल में।वहां कोई इस समय आता नहीं था।
स्नेहा को देख मोहिनी चौंक गई ।
फिर बोली मुझे प्रिंसिपल ने बुलाया था उनसे मिल कर आती हूं।
नहीं भाभी आपको मैंने बुलवाया था।
उसने फिर बहुत अनुरोध किया ,भाभी आप उनलोगों की सच्चाई सबके सामने लाने में मदद करें।
मोहिनी ने कहा _स्नेहा तुम क्या सोचती हो कि मैने प्रयास नहीं किया होगा ,लेकिन वे दरिंदे हैं।
वरुण और सलिल दोनों।शुरुवात में जब मैं न नुकुर करती तो वे मुझे पीटते ,मुझे खाना नहीं दिया जाता।
उसके बाद मैने इसे ही अपनी किस्मत मान लिया ,वो तो भला हो ईश्वर का जो गलती से पलक मेरे पेट में आ गई ,मैने तीन महीने तक कुछ नहीं बताया किसी को नहीं तो वे गर्भपात करा देते।
जब उन्हें पता चला तब वे डॉक्टर के पास ले गए ,लेकिन डॉक्टर ने गर्भपात करने से साफ मना कर दिया।
लेकिन अब तुम्हारे जाने के बाद अब वे मुझे अपने क्लाइंट से मिलने को कह रहे हैं।परसों मुझे एक होटल में जाना है।
अरे वाह भाभी ,बहुत अच्छी खबर सुनाया आपने ।आप कमरे का नंबर मुझे मैसेज कर देना ,मैं कमरे में कैमरे फिट करवा दूंगी।फिर आप क्लाइंट से इस लहजे में बात करना जिससे वो उनलोगो की लिप्तता कबूल ले,और तुरंत हम होटल में छापा मारने के लिए हाई अथॉरिटी से परमिशन ले लेंगे।आप भी बच जाएगी और उन लोगों का भांडा फूट जाएगा।
पर पलक के साथ उन्होंने कुछ किया तो?
उसकी चिंता आप छोड़ दो।आप उनको विश्वास में लो ।
मोहिनी ने वरुण से कहा _ आपके काम से पलक को मैं समय कम दे पा रही हूं सोचती हूं ,इसे मम्मी के पास भेज दूं।
वरूण ने कहा _वाह ,मोहिनी तुम तो बड़ी स्मार्ट हो गई हो।ठीक है मैं कल पलक को उसकी नानी के घर भिजवा दूंगा।
और याद है न तुम्हें कल होटल क्राउन प्लाजा के रूम नंबर_,517 में रात 7बजे पहुंचना है,मैं तुम्हें 9बजे लेने आ जाऊंगा ।काम कर लेना सब _वरुण ने कहा।
जी _मोहिनी मुस्कुराई।
मोहिनी ने ऑडियो रिकॉर्ड कर स्नेहा को भेज दिया ।
रुचि वहां आईजी रमेश चंद्र से मिली,क्योंकि नीचे के अधिकारियों से बात लीक हो सकती थी ,इसे टॉप सीक्रेट मिशन बनाया गया था फुलप्रूफ प्लान के साथ।
अगले दिन होटल क्राउन में पुलिस ने 8 बजे के करीब छापा मारा,मोहिनी के बयान और सबूतों के आधार पर दोनों भाइयों को सजा हुई।
मोहिनी और स्नेहा का बदला पूरा हुआ।अनंत ग्रुप दिवालिया हो गया ।
समाप्त

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