तन से मनुज कर्म से रावण बन जाता है
ब्राह्मण कुली श्रेष्ठ पूजक 
अंत में कलंक लगा जाता है
जर जरा जोरू के कारण
व्यक्ति रावण बन जाता है
कहा गया वो राम सा मन
जो ना चाहे कैसा भी धन
पिता का आज्ञाकारी
संग जानकी हमारी
भाई संग है आज कहाँ
बसते रावण यहां वहां
दो संस्कार परिवारों में
लाड़ से बिगाड़ो ना दीवारों में
अपनी करनी फल देगी
घर से दिए संस्कारो में
रावण को अब राम बनाना
सब ऐसा कुछ कर दिखलाना
वरना लंका जल जाएगी
अपने ही अंगारों में 
संध्या पंवार