मोहिनी दोपहर को स्नेहा को बुलाने आई ,लेकिन स्नेहा ने लंच खाने से भी मना कर दिया।
रात को जब सलिल आया तो भी स्नेहा खामोश रही, जो सलिल के आते ही उसके गले लग जाती।

सलिल ने पूछा आखिर क्या हुआ स्नेहा? सबलोग तुम्हारे कारण  परेशान हो रहे हैं  ,मम्मी,डैडी ,भईया ,भाभी। तुमने  आज लंच भी नहीं किया ?

चलो अब डिनर कर लो।सबको अच्छा लगेगा।
अनमनी सी स्नेहा किसी तरह खाने के टेबल तक आई ,लेकिन उससे खाया नहीं गया।

अगले दिन डॉक्टर को बुलाया गया,चेक अप के बाद डॉक्टर ने कहा ,इन्हें कोई बीमारी नहीं है ,बस कोई बात इन्हें खाए  जा रही है ।इन्हें खुश रखिए और बात को जानने की कोशिश करिए।

सलिल ,और घर वाले उसके आस पास ही रहते ,विशेषकर पलक उससे चिपकी रहती ,तरह तरह की बातें बताती ,उसको नई नई एक्टिविटीज करने कहती ।
थोड़े दिनों में स्नेहा सामान्य होने लगी।करीब एक  महीने भर बाद वो हंसने बोलने  लगी ।

अब वो ऑफिस भी जाने लगी। वहीं एक दिन किसी बात पर सलिल ने विशाल को डांटा था ,जिससे विशाल ने इस्तीफा दे दिया था।

इस्तीफा देखकर स्नेहा ने उसे अपने चैंबर में बुलाया_मिस्टर विशाल ,आप कंपनी के  एक लॉयल कर्मचारी हैं , छोटी मोटी बातों पर इस तरह इस्तीफा देना ठीक नहीं।
विशाल गुस्से में था ,लेकिन स्नेहा की इज्जत करता था,इसलिए धीरे से उसने कहा _आपको नहीं मालूम मैडम ,आपकी फैक्ट्री में क्या क्या खेल चलता है ,ईमानदार लोगों की यहां जरूरत नहीं,और इतना कह वह  चला गया।स्नेहा कुछ नहीं समझी ।


एक दिन रात को खाने के बाद_
सलिल के पापा ने ,सलिल और वरुण  को बताया, कि _ बेटा जर्मनी से बहुत बड़ी पार्टी आई है ।
ऐसा कर वरुण इस बार तू मोहिनी को भी स्नेहा के साथ भेज दे।स्नेहा कंफर्टेबल महसूस करेगी।
जी डैडी_वरुण और सलिल उठ कर अपने अपने कमरे में चले गए।
कमरे में आते ही स्नेहा ने सलिल से कहा _,क्यों बिजनेस में कोई परेशानी है ,आज डैडी ने दोनों भाइयों को रोक लिया ।
अरे नहीं,वो बता रहे थे ,जर्मनी से एक पार्टी आ रही है ,वे  हमारी कंपनी में कुछ इन्वेस्टमेंट करना चाहते हैं ,तो इसके लिए हमें भी उनको खुश करना होगा। 
अच्छा,…तो क्या? उन्हें अच्छे होटल में रुका कर मीटिंग कर लो,यहां अहमदाबाद घुमा दो_कहकर स्नेहा नाइट ड्रेस पहन कर बेड पर आ गई।
लेकिन सलिल को अभी स्नेहा को चलने के लिए मनाना था।इसलिए वो चुपचाप बैठा रहा।
स्नेहा ने पूछा _अब क्या है? सो क्यों नहीं रहे हो।
अरे कुछ नहीं बस नींद नहीं आ रही थी,वो डैडी ने तुम्हें और मोहिनी भाभी को भी चलने को कहा था।
अभी मुश्किल से तुम्हारी तबियत सही हुई है,मैं तुम्हें कैसे कह सकता हूं,मैं डैडी को मना कर दूंगा ।
कह दूंगा ,वरुण भैया और मोहिनी भाभी चले जाएं।
अरे नहीं नहीं मैं चलूंगी ,मोहिनी भाभी भी तो साथ हैं।
ओह माई डार्लिंग ,तुमने मेरी सारी प्रॉब्लम हल कर दी,अब मैं आराम से सोऊंगा। और वैसे इस बार  पार्टी होटल में नहीं ,अपने फार्म हाउस में है।
स्नेहा ने प्यार से उसकी गाल पर हल्की सी चपत लगाई और कहने लगी _बुद्धू इतनी सी बात को लेकर परेशान थे।
चार दिन बाद
सलिल  स्नेहा तैयार हो जाओ,फार्म हाउस चलना है मीटिंग में।
मोहिनी भाभी तैयार हो गईं क्या?_स्नेहा ने पूछा ।
वो पीछे भैया के साथ गाड़ी में आएंगी,तुम जल्दी तैयार हो जाओ_सलिल चिल्लाया।
स्नेहा तैयार होकर आ गई ।आज भी स्नेहा गजब ढा रही थी ,सलिल उसे देख हौले से मुस्कुराया।

उसने अपना फार्म हाउस नहीं देखा था ,शहर से दूर बहुत ही रमणीय स्थल पर था उसका फार्म हाउस।
जोसेफ और जॉन वहां  किसी वक्त ही आने ही वाले थे ।सलिल ने वहां का इंतजाम देखा ,जॉन को पोर्क पसंद था,वहां के रसोइए ने मंगवाया नहीं था, बियर जिस ब्रांड की जोसेफ को पसंद थी वो भी नहीं थी,सलिल उसपर गुस्सा होने लगा।
स्नेहा ने समझाया,_ सलिल ऐसा करो तुम वरुण भैया को बोल दो , वे लोग रास्ते से ले लेंगे।
हां तुम सही कह रही हो,अभी बोलता हूं।
हैलो वरुण भैया,आपलोग निकल चुके _सलिल ने वरुण को फोन लगाते पूछा।
अरे सलिल बस निकलने ही वाले थे कि पलक को तेज बुखार है उसको दवा दिलवा दूं,फिर आऊंगा ,लेकिन अब मोहिनी का आना मुश्किल है क्योंकि पलक उसे छोड़ नहीं रही।
ओके भैया_सलिल ने फोन काट दिया।
क्या हुआ?स्नेहा ने पूछा।वो भैया थोड़ी देर से निकलेंगे ,भाभी नहीं आ पाएंगी,पलक की तबियत खराब है।
तुम यहीं रुको मैं सब सामान लेकर आता हूं।

स्नेहा क्या कहती,उसके पास रुकने के अलावा कोई चारा भी नहीं था।
अभी आधा घंटा ही बीता होगा ,दोनों जोसेफ और जॉन फार्म हाउस पहुंच गए।
स्नेहा ने उनका स्वागत किया,और स्नैक्स लाने को कहा ।
फार्म हाउस में सिर्फ दो कर्मचारी थे,एक रसोइया और दूसरा  केयर टेकर ,जो फार्म हाउस की देख भाल करता था।

स्नैक्स आया दोनों ने बहुत अच्छे से स्नेहा से बात की।जोसेफ ने कहा _आप बहुत अच्छी हैं ,मुझे अहमदाबाद यहां के कल्चर ,हैंडीक्राफ्ट्स में काफी दिलचस्पी है क्या आप मुझे इसे समझने में अपना समय देंगी ।अगर आप बुरा न मानें तो मुझे आप गाइड से बेहतर अहमदाबाद घुमा सकती हैं।जॉन तो आज ही डील साइन कर जर्मनी चले जाएंगे ।मैं यहां दो दिन रुकूंगा।

क्यों नहीं मैं जरूर आपको यहां की हस्तकलाओं से परिचय कराऊंगी ,ये मेरे लिया गौरव की बात है_स्नेहा ने कहा।
तब तक सलिल आ चुका था ,लंच तैयार हो रहा था।
जोसेफ ने स्नेहा की सलिल से बहुत तारीफ की _मिस्टर सलिल आपकी पत्नी बहुत ब्यूटी विथ ब्रेन हैं।जो ज्यादातर महिलाओं में नहीं मिलता ,और सब हंसने लगे।
उनकी ये मुलाकात बहुत अच्छी रही जिस लिए वे आए थे वो डील फाइनल हो गई,और आगे गुजरात के हस्तशिल्प को विदेश  में पहुंचाने का भी समझौता हो सकता था।
स्नेहा और सलिल खूब खुश थे।

घर पहुंचकर स्नेहा सबसे पहले पलक के पास गई ,पलक को वास्तव में बुखार था ,मोहिनी भाभी डरी हुई बैठी थी।

स्नेहा ने कहा ,क्या हुआ भाभीआप परेशान क्यों हो रहीं हैं, पलक का बुखार उतर जाएगा ,जब डॉक्टर ने दवा दे दी है तो।
नही नहीं मैं परेशान नहीं हूं,मोहिनी कुछ कहना चाहती थी ,तभी वरुण आ गया ,उसने कहा वाह स्नेहा तुमने तो बहुत इंप्रेस कर दिया सबको ।
स्नेहा मुस्कुराई और कमरे से बाहर निकल गई।
सलिल की मम्मी और उसके डैडी बहुत गर्व से स्नेहा को देख रहे थे ,आखिरकार स्नेहा के कारण ही तो उन्हें ये दो डील मिली थी।

क्रमशः