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जाने क्या हुआ हैं मेरे इस दिल को
कुछ बदला बदला सा अंदाज़ लगता हैं
छेड़ रही हैं धड़कन को अहसास नयी
लगता हैं दिल को मेरी किसी के चाहत मंज़ूर होगयी...!!

मौसम तो अक्सर बदलता रहता हैं
पर पहले कभी ऐसा कुछ महसूस नहीं किया दिल ने
कभी अहसास सुकून की तो कभी यादो की हैं बेक़रारी
लगता हैं दिल को मेरी किसी के चाहत मंज़ूर होगयी...!!

ऐसा क्या गजब हुआ की दिल मेरे बस में ना रहा
छोड़ मेरी फिकर ये किसी और के प्यार में खोगया
मोहब्बत के नशे हवा बनके मेरी साँसो में कब समा गयीं
लगता हैं दिल को मेरी किसी के चाहत मंज़ूर होगयी...!!

किसका तस्वीर हैं बसा ख़्वाबों में जो धुंधला सा दीखता हैं
छेड़ता हैं मेरी धड़कन को शरारत उसकी जब आँखों से मस्ती करता हैं
आता नहीं हैं सामने कभी मेरे दिल को भी जिसके दीद के आस हैं
लगता हैं दिल को मेरी उसी के चाहत मंज़ूर होगयी...!!

वो शख्स जो भी हैं लगता दिल को बहुत खास हैं
आँखे बंद करते ही आहट मिलती जैसे वो मेरे ही आसपास हैं
शब्दो के मतलब ना समझने वाली आज उसके लिए अल्फाज़ है जोड़ रही
दिल को जो प्यार मंज़ूर हुआ ये पागल नैना जैसे शायरा ही बन गयीं....!!
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