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ये आँगन भी वही है और ये वही नीम का पेड़ भी
लेकिन इसमें रहने जाने कहाँ खो गए
नहीं गूंजती शोर कोई वो चिडियो जैसी
लगता है नन्ही नन्ही चिड़िया अब बड़ी होगयी....!!
ये आँगन भी वही है और ये वही बाग़ भी
लेकिन इसमें खिलने वाली कलिया जाने कहाँ खो गए
नहीं महकती है अब कोई खुशबू फूलो की
लगता है नन्ही नन्ही सी कलिया मुरझा कर बिखर गयीं...!!
ये आँगन भी वही है और ये वही सावन का बहार भी
लेकिन इसमें लगने वाली मेले जाने कहाँ खो गए
नहीं लगते है अब यहाँ सावन का झूला कोई
लगता है सखियों के खिलखिलाहट होठों की खामोश होगयीं...!!
ये आँगन भी वही है ये वही बाबुल का घर भी
लेकिन इसमें गूंजती पायल की शोर जाने कहाँ खो गए
नहीं खेलती है अब इस आँगन में गुड़ियों का खेल कोई
लगता है इस घर की बेटियाँ साजन के घर बिदा होगयी....!!
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नैना....✍️✍️💞

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