वो बचपन के पन्ने वो कागज़ की कश्ती,
हमने भी की है मौज मस्ती,
वो बारिश का पानी वो बूंदों की खनखन,
वो मदमस्त हवाओं का रुख बदलना,
वो मिट्टी के गड्ढों में खिलखिलाती हँसी,
वो बरखा का पानी वो नदियाँ उफानी,
वो पक्षियों का चहकना वो बादलों की उठखेलियाँ,
वो बचपन में बच्चे से मन की चहकती शैतानियाँ,
हमने भी की है मौज मस्ती।
प्रिया धामा

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