कागज़ और कलम सच्ची सहेली हैं। लिखती तो कलम है, पर कहानी कागज़ पर बन जाती है। दिल की कहानी जो दिमाग से बन जाती है वो प्यारी कलम, जो शब्दों के मोती पिरोकर कागज़ पर बिखर जाती है। कोई इस कलम के जरिए अपनी मंजिल तक पहुंच जाता है। कोई किसी के दिल में उतर जाता है, किसी के शब्द दिल को छू जाते हैं। किसी की रचना मन को प्रफुल्लित कर देती है तो किसी की शब्दावली दिल झकझोर कर रख देती है। कोई अपनी कलम के द्वारा दिलो पर छाप छोड़ देता है तो कुछ कहानियों में कुछ राज़ छुपे होते है। एक ऐसी कलम जो कागज़ पर रंग बिखेर देती है। एक ऐसी सहेली जो कभी अलग हो जाए तो किसी के काम नहीं आती और साथ हो तो दिल जीत लेती है।
प्रिया धामा

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